धर्म-अध्यात्म

नवगुंजर: Lord Vishnu का 9-जैविक अंगों वाला अद्भुत अवतार

Harrison
25 Oct 2025 9:40 PM IST
नवगुंजर: Lord Vishnu का 9-जैविक अंगों वाला अद्भुत अवतार
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Religion Spirituality, धर्म अध्यात्म : हिंदू धर्म में भगवान श्रीविष्णु के अनेक अवतारों का वर्णन मिलता है, जिनमें से एक अत्यंत अद्भुत और रहस्यमय अवतार है 'नवगुंजर'। यह अवतार विशेष रूप से ओडिशा के महाभारत संस्करण में वर्णित है, जिसे ओडिया कवि सरला दास ने लिखा है। 'नवगुंजर' एक दिव्य प्राणी है, जो नौ विभिन्न जानवरों के अंगों से मिलकर बना है।
नवगुंजर का रूप:
नवगुंजर के शरीर में निम्नलिखित नौ जानवरों के अंग समाहित हैं:
सिर: मुर्गे का सिर, जो जागरूकता और समय की पहचान का प्रतीक है।
गर्दन: मोर की गर्दन, जो सौंदर्य और आकर्षण का प्रतीक है।
कमर: शेर की कमर, जो शक्ति और साहस का प्रतीक है।
पेट: सांप की पूंछ, जो रहस्य और परिवर्तन का प्रतीक है।
हाथ: मनुष्य का एक हाथ, जो कमल या चक्र धारण किए हुए है, जो ज्ञान और धर्म का प्रतीक है।
पैर: हाथी, बाघ और घोड़े के तीन पैर, जो स्थिरता, गति और शक्ति का प्रतीक हैं।
इस अद्भुत रूप में भगवान श्रीविष्णु ने अर्जुन के समक्ष प्रकट होकर उन्हें ब्रह्मांड की विराटता और दिव्यता का अहसास कराया।
महाभारत में नवगुंजर का प्रसंग:
महाभारत के ओडिया संस्करण में वर्णित है कि अर्जुन जब तपस्या में लीन थे, तब भगवान श्रीविष्णु ने नवगुंजर के रूप में उनके समक्ष प्रकट होकर उन्हें ब्रह्मांड की विराटता का दर्शन कराया। अर्जुन ने पहले इस विचित्र रूप को देखकर अपने धनुष से प्रहार करने का विचार किया, लेकिन बाद में उन्होंने इसे भगवान श्रीविष्णु का रूप समझकर नमन किया।
नवगुंजर की सांस्कृतिक और धार्मिक महत्ता:
नवगुंजर का चित्रण
ओडिशा की पारंपरिक चित्रकला 'पटचित्रा' में प्रमुख रूप से किया जाता है। यह चित्रकला भगवान श्रीविष्णु के विभिन्न रूपों और उनके अवतारों को दर्शाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। नवगुंजर का रूप न केवल भगवान की विराटता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि भगवान सर्वव्यापी हैं और उनके रूप अनंत हैं।
नवगुंजर का अवतार भगवान श्रीविष्णु की अनंतता और सर्वव्यापकता का प्रतीक है। यह अवतार हमें यह सिखाता है कि भगवान के रूप और स्वरूप अनगिनत हैं, और हमें उनकी भक्ति में किसी भी रूप में विश्वास करना चाहिए। नवगुंजर का चित्रण ओडिशा की सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो भगवान श्रीविष्णु की विराटता को दर्शाता है।
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