धर्म-अध्यात्म

मुस्लिम कारीगर सजा रहे कान्हा का दरबार जन्माष्टमी की परंपरा बरकरार

nidhi
3 Sept 2026 2:25 PM IST
मुस्लिम कारीगर सजा रहे कान्हा का दरबार जन्माष्टमी की परंपरा बरकरार
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कृष्ण सजावट में जुटे मुस्लिम कारीगर
मथुरा: भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में जन्माष्टमी और गोकुलाष्टमी का पर्व हर साल भव्य तरीके से मनाया जाता है। इस उत्सव की तैयारियों में जहां भक्तों की आस्था दिखाई देती है, वहीं मथुरा के कुछ मुस्लिम कारीगर भी अपनी कला के जरिए इस धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। कृष्ण जन्मोत्सव के लिए मंदिरों और झांकियों की सजावट में इन कारीगरों की बारीक कारीगरी देखने को मिलती है। रंग-बिरंगे कपड़ों, मुकुट, पोशाक और सजावटी सामान तैयार करने वाले ये कलाकार अपनी कला से श्रीकृष्ण की लीलाओं को और आकर्षक बना देते हैं।
पीढ़ियों से जुड़ी है सजावट की कला
मथुरा के कई मुस्लिम कारीगर लंबे समय से भगवान कृष्ण की पोशाक और श्रृंगार सामग्री तैयार करने का काम कर रहे हैं। यह कला उनके परिवारों में पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। इन कारीगरों के लिए यह केवल रोजगार नहीं बल्कि एक ऐसी कला है, जो उन्हें मथुरा की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ती है।
कृष्ण के श्रृंगार में दिखती है बारीकी
जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान कृष्ण के लिए विशेष पोशाक, मुकुट, बांसुरी, आभूषण और अन्य सजावटी वस्तुएं तैयार की जाती हैं। कारीगर महीनों पहले से इन सामानों को बनाने में जुट जाते हैं। महीन कढ़ाई, रंगों का चयन और डिजाइन की बारीकियां इनकी कला को खास बनाती हैं।
धार्मिक सौहार्द की मिसाल
मथुरा की यह परंपरा धार्मिक सद्भाव और आपसी सहयोग का उदाहरण भी पेश करती है। यहां कृष्ण भक्ति से जुड़े आयोजनों में अलग-अलग समुदायों के लोग अपनी-अपनी भूमिका निभाते हैं। मुस्लिम कारीगरों द्वारा कृष्ण के श्रृंगार के लिए काम करना इस बात को दिखाता है कि कला और संस्कृति लोगों को जोड़ने का माध्यम बन सकती है।
जन्माष्टमी पर बढ़ जाती है मांग
गोकुलाष्टमी और जन्माष्टमी के समय कृष्ण पोशाक और सजावट की मांग कई गुना बढ़ जाती है। देशभर के मंदिरों और भक्तों के लिए मथुरा से विशेष श्रृंगार सामग्री भेजी जाती है। कारीगरों का कहना है कि भगवान कृष्ण की सेवा से जुड़े इस काम को करते हुए उन्हें खुशी और गर्व महसूस होता है।
कला के जरिए कायम है परंपरा
मथुरा की गलियों में तैयार होने वाली कृष्ण की पोशाक और सजावट की सामग्री देशभर में प्रसिद्ध है। इन कारीगरों की मेहनत और हुनर ने इस परंपरा को वर्षों से जीवित रखा है। गोकुलाष्टमी 2026 पर भी इन कलाकारों की बनाई सजावट भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव की भव्यता को और बढ़ाएगी।
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