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नई दिल्ली: 21 अक्टूबर की सुबह चंद्र देव कुंभ राशि में गोचर करने जा रहे हैं। चंद्रमा का यह गोचर करीब सुबह 7 बजे के आसपास होगा। कुंभ राशि में पहले से ही राहु मौजूद है और बुधवार की सुबह चंद्र देव के प्रवेश करने से चंद्रमा और राहु के बीच युति होगी, जिससे चंद्र ग्रहण दोष बनेगा।
इस ग्रहण दोष के चलते जीवन में कुछ खास तरह के बदलाव देखने को मिलेंगे। आइए जानते हैं चंद्रमा-राहु की युति से होने वाले प्रभाव और उपाय के बारे में।
चंद्र-राहु युति 2026
चंद्रमा जो जल तत्व से जुड़ा है, जिसे मन, माता, भावना, जल, मानसिक शांति और जनता का कारक माना जाता है। जबकि राहु वायु तत्व का छाया क्रूर ग्रह है, जिसे भ्रम, अचानक घटनाएं और महत्वाकांक्षा का कारक माना जाता है। चंद्र-राहु की युति को 'चंद्र ग्रहण दोष' कहा जाता है।
ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा राहु को सम यानी (न तो दोस्त और न ही दुश्मन) मानता है। जबकि इसके विपरीत राहु चंद्रमा को अपना दुश्मन मानता है। कुंडली के अलग-अलग भाव में चंद्र और राहु की युति का प्रभाव काफी अलग-अलग देखने को मिल सकता है।
चंद्रमा- राहु युति के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव
सकारात्मक प्रभाव
चंद्रमा-राहु युति के दौरान जातक में एक शक्तिशाली बदलाव की प्रवृत्ति उत्पन्न होती है। जातक को अपने जीवन को अलग-अलग नजरिए से देखने में मदद मिलती है। अब वो कुछ भी फैसले लेने से पहले या कुछ करने से पहले उससे होने वाले परिणामों को भी सोचता-समझता है।
इस दौरान तर्क और विवेक पर बेहतर ढंग से सोच-विचार करके मन की भावनाओं को स्थिर करने की प्रवृत्ति उत्पन्न होती है।
यह व्यक्ति को लंबे समय तक कड़ी मेहनत करने की क्षमता प्रदान करता है और साथ ही में उस सपने या विचार को पूरा करने में भी मदद करता है, जिसे वे हमेशा से पाना चाहता था।
नकारात्मक प्रभाव
चंद्रमा और राहु की युति से व्यक्ति भयभीत हो सकता है और कभी-कभी वह ज्यादा चिंतित भी हो सकता है। इससे भावनाओं में कई तरह के बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
चंद्र और राहु की युति से मति भ्रम, अनिद्रा, सिरदर्द, मनोदैहिक समस्याएं और यहां तक कि भूत-प्रेत के प्रभाव भी लक्षण देखने को मिल सकते हैं।
चंद्र और राहु दोष के उपाय
चंद्रमा और राहु युति के दौरान चंद्रमा को मजबूत करने के लिए जातक को 'ऊं चंद्राय नमः' या शिव पूजन, माता की सेवा और जल व दूध का दान करना चाहिए। इसके अलावा रत्न के तौर पर मोती चांदी की अंगूठी में कनिष्ठा में सोमवार को धारण करना चाहिए। इसके अलावा सफेद वस्तुएं का दान करने से मन शांत होता है।
राहु को शांत करने के लिए 'ऊं रां राहवे नमः', दुर्गा, भैरव पूजन, सरस्वती आराधना और शनिवार के दिन सेवा से जुड़े कार्य में भाग लेना चाहिए। रत्न गोमेद चांदी या पंचधातु में बिना परामर्श के धारण करना चाहिए। इसके अलावा नीले-भूरे रंग के कपड़े, तिल, नारियल व उड़द की दाल दान करने से फायदा हो सकता है।
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