धर्म-अध्यात्म

29 अप्रैल को है मासिक शिवरात्रि , जानें पूजा का शुभ मुहूर्त

Rani Sahu
22 April 2022 2:38 PM GMT
29 अप्रैल को है मासिक शिवरात्रि , जानें पूजा का शुभ मुहूर्त
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हर माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि (Masik Sivratri) का व्रत भक्त रहते हैं

हर माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि (Masik Sivratri) का व्रत भक्त रहते हैं . शिव (Lord Shiv) भक्तों के लिए ये दिन हमेशा से खास होता है. माना जाता है कि खुद भगवान शिव को मासिक शिवरात्रि का व्रत बेहद प्रिय है. इस दिन अगर पूरे विधि विधान के साथ पूजा की जाए तो भगवान शिव की कृपा भक्त को मिलती है. मासिक शिवरात्रि में खास रूप से भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा की जाती है. इस बार की मासिक शिवरात्रि 29 अप्रैल, शुक्रवार के दिन पड़ रही है. आइए जानते हैं वैशाख माह की तिथि, पूजन मुहूर्त (Masik Sivratri Puja time) और महत्व के बारे में.

जानिए मासिक शिवरात्रि 2022 तिथि और पूजन मुहूर्त
वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 28 अप्रैल को दिन गुरुवार को रात में 12 बजकर 26 मिनट से आरंभ हो जाएगी. जबकि 29 अप्रैल की देर रात 12 बजकर 57 मिनट पर चतुर्थी तिथि का समापन हो जाएगा. ऐसे में 29 तारीख को उदयातिथि में चतुर्थी होने के कारण से पूजा 29 अप्रैल को ही होगी. वैशाख माह की मासिक शविरात्रि की रात्रि पहर के पूजन का शुभ मुहूर्त 11 बजकर 57 मिनट से देर रात 12 बजकर 40 मिनट तक है.
मासिक शिवरात्रि का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार मासिक शिवरात्रि का व्रत जो भी भक्त करते हैं उनके जीवन से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं. अगर जीवन में कोई परेशानी हो तो इस दिन पूरी श्रद्धा से पूजा करनी चाहिए. भगवान शिव अपने भक्तों को सुख, संपत्ति, संतान, आरोग्य, साहस सब कुछ प्रदान करते हैं. इस दिन स्नान करके शिवलिंग पर जल जरूर चढ़ाना चाहिए
मासिक शिवरात्रि के दिन बरतें ये सावधानी
1. मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा में तुलसी पत्ता गलती से भी अर्पित न करें. इतना ही नहीं पूजा के पंचामृत में भी तुलसी का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए.
2. भगवान शिव को इस दिन पूजा में गलती से भी सिंदूर या कुमकुम नहीं चढ़ाया चाहिए. भोलनाथ को विध्वंसक के रूप में जाना जाता है. हालांकि इसी पूजा में माता पार्वती को सिंदूर चढ़ाया जा सकता है.
3. भगवान शिव की पूजा में नारियल नहीं चढ़ना चाहिए. इसके साथ ही माना जाता है कि शंख से जल नहीं अर्पित करना चाहिए और न ही शंख का इस्तेमाल करना चाहिए.


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