धर्म-अध्यात्म

Mokshada Ekadashi Vrat : नवंबर या दिसंबर में क्यों होती है कंफ्यूजन

Harrison
27 Nov 2025 7:26 PM IST
Mokshada Ekadashi Vrat : नवंबर या दिसंबर में क्यों होती है कंफ्यूजन
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Religion Spirituality, धर्म अध्यात्म : हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और इसे आध्यात्मिक शुद्धि, पाप नाश और मोक्ष प्राप्ति के लिए रखा जाता है। उनमें से मोक्षदा एकादशी विशेष रूप से पुण्य और मोक्ष देने वाली मानी जाती है। लेकिन अक्सर श्रद्धालुओं के बीच यह सवाल उठता है कि मोक्षदा एकादशी नवंबर में है या दिसंबर में। इस कंफ्यूजन के पीछे मुख्य कारण हिंदू पंचांग की तिथियों और कैलेंडर के आधार में अंतर है।
मोक्षदा एकादशी, जिसे आमतौर पर धनतेरस से कुछ दिन पहले या उसके आसपास माना जाता है, हर साल हिंदू पंचांग के अनुसार तय होती है। हिंदू पंचांग चंद्र मास पर आधारित होता है, यानी यह चंद्रमा के चरणों और विशेष रूप से कृष्ण पक्ष या शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर निर्भर करता है। इसका मतलब है कि ग्रेगोरियन कैलेंडर (सामान्य सौर कैलेंडर) के अनुसार इसका दिन हर साल बदलता रहता है। इसी वजह से कभी यह नवंबर में आती है और कभी दिसंबर में।
इस वर्ष भी श्रद्धालुओं में यही भ्रम देखा जा रहा है। कुछ कैलेंडर में मोक्षदा एकादशी की तिथि नवंबर के अंतिम सप्ताह में दिखाई दे रही है, जबकि अन्य स्रोत इसे दिसंबर की शुरुआत में दिखा रहे हैं। इसका कारण यह है कि हिंदू पंचांग विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग बनते हैं। उत्तर भारत, दक्षिण भारत और पश्चिमी भारत में पंचांग के समय और चंद्रमा की स्थिति के आधार में सूक्ष्म अंतर होता है। इसके अलावा, स्थान के हिसाब से सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में भिन्नता के कारण एकादशी का दिन कुछ राज्यों में एक दिन पहले या बाद में पड़ सकता है।
मोक्षदा एकादशी का महत्व भी इसे विशेष बनाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत विशेष रूप से पापों से मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति के लिए रखा जाता है। इसे रखने से श्रद्धालु को शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं। व्रत का नियम यह है कि इस दिन उपवास रखा जाता है और भगवान विष्णु की भक्ति में समय बिताया जाता है। लोग इस दिन कथा और जप, पूजा-पाठ और दान करने की परंपरा निभाते हैं।
इस कंफ्यूजन को दूर करने के लिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि स्थानीय पंडित या पंचांग का अनुसरण करना सबसे सुरक्षित तरीका है। कई धार्मिक ऐप्स और ऑनलाइन पंचांग भी व्रत की सटीक तिथि बताने में मदद करते हैं। इसके अलावा, एकादशी का व्रत कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की तिथि पर आधारित होता है, इसलिए यदि किसी वर्ष में चंद्रमा की एकादशी रात 11 बजे के बाद पड़ती है, तो व्रत अगले दिन मनाया जाता है। यह भी कई बार भ्रम का कारण बनता है।
अतः, मोक्षदा एकादशी के लिए निश्चित तारीख जानने के लिए क्षेत्रीय पंचांग का पालन करना आवश्यक है। इस तरह श्रद्धालु सही दिन उपवास और पूजा करके अधिक पुण्य कमा सकते हैं। इस वर्ष, विशेषज्ञों का कहना है कि यह व्रत नवंबर और दिसंबर के अंत में हो सकता है, और यह पूरी तरह आपके स्थान और पंचांग पर निर्भर करेगा।
धार्मिक परंपरा के अनुसार, मोक्षदा एकादशी का महत्व केवल तिथि तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका पालन श्रद्धा और भक्ति के साथ करना ही सर्वोत्तम माना जाता है। इसलिए, श्रद्धालु चाहे वह नवंबर में करें या दिसंबर में, एकादशी का व्रत उनकी आध्यात्मिक यात्रा के लिए लाभकारी रहेगा।
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