धर्म-अध्यात्म

Mauni Amavasya 2026: संगम स्नान के बाद इन 5 गलतियों से बचना जरूरी

Harrison
15 Jan 2026 8:53 PM IST
Mauni Amavasya 2026: संगम स्नान के बाद इन 5 गलतियों से बचना जरूरी
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Prayagraj प्रयागराज: माघ मेले का तीसरा और अत्यंत पवित्र शाही स्नान मौनी अमावस्या के अवसर पर 18 जनवरी 2026, रविवार को किया जाएगा। मौनी अमावस्या को हिंदू धर्म में विशेष पुण्यदायी माना गया है। इस दिन पवित्र नदियों, विशेष रूप से प्रयागराज के संगम में स्नान करने से व्यक्ति को विशेष पुण्य की प्राप्ति मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए स्नान, दान और जप का फल कई गुना बढ़ जाता है।
धार्मिक ग्रंथों और विद्वानों के अनुसार, मौनी अमावस्या पर स्नान के बाद कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है। कहा जाता है कि स्नान के बाद यदि कुछ विशेष गलतियां की जाएं, तो प्राप्त पुण्य अधूरा रह सकता है। इसी कारण श्रद्धालुओं को स्नान के बाद विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
पहली गलती, स्नान के बाद अपवित्र व्यवहार करना। धार्मिक मान्यता है कि संगम स्नान के बाद व्यक्ति को शुद्ध आचरण बनाए रखना चाहिए। स्नान के तुरंत बाद क्रोध, झूठ, अपशब्द या विवाद से बचना जरूरी माना गया है। ऐसा करने से स्नान का पुण्य कम हो सकता है।
दूसरी गलती, दान से विमुख रहना। मौनी अमावस्या पर स्नान के बाद दान का विशेष महत्व बताया गया है। वस्त्र, अन्न, तिल, कंबल या धन का दान करने से पुण्य पूर्ण माना जाता है। बिना दान किए लौटना धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता।
तीसरी गलती, मौन का पालन न करना। मौनी अमावस्या का नाम ही मौन से जुड़ा है। मान्यता है कि इस दिन यथासंभव मौन रहना चाहिए। स्नान के बाद अनावश्यक बातचीत, हंसी-मजाक या शोर-शराबा करने से व्रत और स्नान का प्रभाव कम हो सकता है।
चौथी गलती, तामसिक भोजन का सेवन। संगम स्नान के बाद सात्विक भोजन करने की परंपरा है। इस दिन मांसाहार, शराब और अन्य तामसिक पदार्थों से पूरी तरह दूरी रखने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि तामसिक भोजन पुण्य को क्षीण कर देता है।
पांचवीं गलती, बुजुर्गों और साधु-संतों का अपमान। मौनी अमावस्या पर स्नान के बाद साधु-संतों, ब्राह्मणों और जरूरतमंदों का सम्मान करना आवश्यक माना गया है। किसी का अपमान या अनादर करना धार्मिक दृष्टि से दोषपूर्ण माना जाता है।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार, मौनी अमावस्या पर संगम स्नान आत्मशुद्धि का अवसर होता है। इस दिन संयम, मौन, सेवा और दान के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मकता लाने का प्रयास करता है। माघ मेले में लाखों श्रद्धालु इस दिन पवित्र स्नान के लिए पहुंचते हैं और धार्मिक नियमों का पालन करते हैं।
कुल मिलाकर, मौनी अमावस्या 2026 पर संगम स्नान के बाद इन पांच गलतियों से बचना आवश्यक माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नियमों के साथ किया गया स्नान ही पूर्ण पुण्य प्रदान करता है और व्यक्ति के जीवन में शांति और संतुलन बनाए रखता है।
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