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धर्म-अध्यात्म
महिला पूर्वजों के श्राद्ध का दिन मातृ नवमी, जानें सही तारीख और पूजा विधि
nidhi
28 Sept 2026 9:07 AM IST

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पितरों के आशीर्वाद के लिए करें ये श्राद्ध कर्म
नई दिल्ली: पितृ पक्ष में मातृ नवमी का विशेष महत्व माना जाता है। यह दिन उन महिला पूर्वजों के श्राद्ध के लिए समर्पित होता है, जिनका निधन हो चुका है। साल 2026 में मातृ नवमी का श्राद्ध 4 अक्टूबर, रविवार को किया जाएगा। इस दिन माता, दादी, नानी और परिवार की अन्य दिवंगत महिलाओं का स्मरण कर श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा है।
मातृ नवमी 2026, महिला पूर्वज श्राद्ध, पितृ पक्ष तिथि, श्राद्ध विधि की मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। मातृ नवमी को विशेष रूप से मातृ पक्ष की महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। जिन महिलाओं की मृत्यु नवमी तिथि को हुई हो, उनका श्राद्ध भी इसी दिन किया जाता है।
मातृ नवमी श्राद्ध की विधि
मातृ नवमी के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनने के बाद पूजा स्थान को साफ किया जाता है। इसके बाद पूर्वज महिलाओं का स्मरण कर श्राद्ध का संकल्प लिया जाता है।
पितरों के नाम और गोत्र का स्मरण करते हुए जल से तर्पण किया जाता है।
तर्पण में जल, काले तिल और कुश का प्रयोग करने की परंपरा है।
पिंडदान और पूजा परिवार की परंपरा के अनुसार की जाती है।
ब्राह्मण भोजन, दान और जरूरतमंदों को भोजन कराने की भी मान्यता है।
मातृ नवमी का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक श्राद्ध करने से दिवंगत मातृ शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। परिवार की सुख-शांति और पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए लोग इस दिन पूजा-पाठ करते हैं। मातृ नवमी को कई स्थानों पर “मातृ श्राद्ध” के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन विशेष रूप से उन महिलाओं को याद किया जाता है, जिन्होंने परिवार के पालन-पोषण और संस्कारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
4 या 5 अक्टूबर में कौन सी सही तारीख?
पितृ पक्ष 2026 की तिथि सूची के अनुसार नवमी श्राद्ध 4 अक्टूबर 2026 को है, जबकि 5 अक्टूबर को दशमी श्राद्ध किया जाएगा। इसलिए महिला पूर्वजों के श्राद्ध के लिए मातृ नवमी की तिथि 4 अक्टूबर रहेगी। श्राद्ध कर्म में तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु तिथि ज्ञात हो तो उसी तिथि के अनुसार श्राद्ध करना प्रमुख माना जाता है। वहीं, तिथि ज्ञात न होने पर सर्वपितृ अमावस्या का महत्व बताया गया है।
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