धर्म-अध्यात्म

Makar Sankranti 2026: सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व, गंगा स्नान और पूजा का विशेष महत्व

Harrison
11 Jan 2026 10:00 PM IST
Makar Sankranti 2026: सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व, गंगा स्नान और पूजा का विशेष महत्व
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Religion Spirituality,धर्म अध्यात्म : जनवरी का महीना धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। हर साल मकर संक्रांति सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाई जाती है। इस दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं, जिससे दिन लंबा और रात छोटी होती है। यह पर्व विशेष रूप से धार्मिक अनुष्ठान, पूजा और सामाजिक परंपराओं का प्रतीक माना जाता है।
मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। लोग पवित्र गंगा में स्नान करके अपने पापों से मुक्ति पाने की कामना करते हैं। इसके साथ ही इस दिन पूजा-पाठ, जप-तप और दान का भी महत्व है। गरीबों और जरूरतमंदों को दान देने से पुण्य की प्राप्ति होती है और धार्मिक ग्रंथों में इसे अत्यंत शुभ माना गया है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन पितरों का श्राद्ध और तर्पण करना भी लाभकारी होता है। इससे पूर्वजों को शांति मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। विशेष रूप से सूर्य देव की पूजा से स्वास्थ्य, आयु और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
मकर संक्रांति का पर्व कृषि और फसल कटाई से भी जुड़ा है। इसे किसानों के लिए उत्सव का दिन माना जाता है, क्योंकि यह फसल कटाई के समय का प्रतीक है। इस अवसर पर तिल और गुड़ के व्यंजन बनाकर परिवार और मित्रों के साथ बांटे जाते हैं। यह परंपरा सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से संकट दूर होते हैं और जीवन में समृद्धि आती है। शिवलिंग का अभिषेक, जल, दूध, दही और घी से किया जाता है। इसके साथ ही बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्री का इस्तेमाल कर शिव-पूजा की जाती है। इससे मनोकामनाओं की पूर्ति और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
मकर संक्रांति के अवसर पर लोग मेलों और सामाजिक आयोजनों में भी भाग लेते हैं। पतंग उड़ाने की परंपरा विशेष रूप से बच्चों और युवाओं के बीच लोकप्रिय है। इसे खुशी और उत्साह का प्रतीक माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मकर संक्रांति केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह लोगों में मिलन, सहयोग और परंपरा के प्रति सम्मान की भावना को बढ़ाता है।
इस प्रकार, मकर संक्रांति का पर्व न केवल सूर्य देव के उत्तरायण होने का प्रतीक है, बल्कि पूजा, दान, तर्पण और सामाजिक मिलन का भी अवसर है। गंगा स्नान, शिव पूजा और पितरों का तर्पण इस दिन की धार्मिक महत्ता को और बढ़ाते हैं। यह दिन जीवन में सुख, समृद्धि और आशीर्वाद लेकर आता है।
मुख्य बातें:
पर्व: मकर संक्रांति
तिथि: सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश के दिन
महत्व: गंगा स्नान, पूजा, जप-तप, दान
धार्मिक मान्यता: पितरों का तर्पण, शिव पूजा से संकट निवारण और सुख-समृद्धि
परंपरा: तिल और गुड़ के व्यंजन, पतंग उड़ाना, सामाजिक मिलन
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