धर्म-अध्यात्म

Makar Sankranti 2026: तारीख पर विवाद, 14 या 15 जनवरी

Harrison
13 Jan 2026 8:22 PM IST
Makar Sankranti 2026: तारीख पर विवाद, 14 या 15 जनवरी
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Religion Spirituality,धर्म अध्यात्म: शास्त्रों में मकर संक्रांति को अंधेरे से उजाले की ओर बढ़ने का प्रतीक माना गया है। इस दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य का उत्तर दिशा में जाना शुभ संकेत होता है। इसके बाद सभी मांगलिक कार्य शुरू किए जा सकते हैं और ग्रहों की शुभता प्राप्त होती है।
मकर संक्रांति पर स्नान, दान, खिचड़ी का भोग बनाना और पितरों का तर्पण करने की परंपरा है। ऐसा करने से जीवन में सुख, सौभाग्य और समृद्धि बढ़ती है। पर्व का महत्व न केवल धार्मिक दृष्टि से है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर लोग अपने परिवार और पड़ोसियों के साथ मिलकर धार्मिक अनुष्ठान और उत्सव मनाते हैं।
हालांकि, इस साल मकर संक्रांति की तारीख को लेकर लोगों में कन्फ्यूजन देखा जा रहा है। कुछ लोग इसे 14 जनवरी को मनाने का सुझाव दे रहे हैं, जबकि अन्य इसे 15 जनवरी को मनाने की बात कर रहे हैं। ज्योतिषियों और पंडितों के अनुसार, सूर्य का उत्तरायण होना और पंचांग में दी गई स्थिति के आधार पर सही तारीख तय की जा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पर्व की सही तिथि जानने के लिए पंचांग और सूर्य की स्थिति का अध्ययन करना जरूरी है। इसके अनुसार ही स्नान, तर्पण और अन्य धार्मिक कर्म करने चाहिए, ताकि उनका पूर्ण फल प्राप्त हो सके। मकर संक्रांति का महत्व केवल धार्मिक कर्मों तक सीमित नहीं है। इसे लेकर कई सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
मकर संक्रांति का पर्व पूरे देश में विभिन्न रूपों में मनाया जाता है। उत्तर भारत में यह पर्व खासतौर पर खिचड़ी और तिल के व्यंजनों के साथ मनाया जाता है, जबकि दक्षिण भारत में इसे पोंगल के रूप में उत्सव के साथ मनाते हैं। इस दिन सूर्य की दिशा बदलने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और लोग स्वास्थ्य, धन और खुशहाली की कामना करते हैं।
पंडितों का कहना है कि मकर संक्रांति पर पितरों का तर्पण और दान करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे पूर्वजों की कृपा मिलती है और जीवन में स्थायी सुख और समृद्धि आती है। साथ ही स्नान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करने से
मानसिक शांति और आध्यात्मिक लाभ
भी प्राप्त होते हैं।
इस साल तारीख को लेकर विवाद के बावजूद, पर्व का महत्व कम नहीं होता। विशेषज्ञों की सलाह है कि लोग सूर्य की स्थिति और पंचांग देखकर ही मकर संक्रांति मनाएं। इससे न केवल धार्मिक अनुष्ठानों का फल प्राप्त होता है, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक कार्यक्रम भी सही ढंग से आयोजित किए जा सकते हैं।
इस प्रकार, मकर संक्रांति न केवल सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है, बल्कि यह जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मकता लाने वाला पर्व भी है। चाहे इसे 14 जनवरी मनाया जाए या 15 जनवरी, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पर्व का महत्व और इसके अनुष्ठानों का लाभ समान रहता है।
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