- Home
- /
- अन्य खबरें
- /
- धर्म-अध्यात्म
- /
- महामृत्युंजय मंत्र:...
धर्म-अध्यात्म
महामृत्युंजय मंत्र: संतों की जान बचाने वाला शक्तिशाली उपाय
Tara Tandi
14 Sept 2025 4:48 PM IST

x
ज्योतिष न्यूज़: भारतीय संस्कृति में मंत्रों का विशेष महत्व है। इनमें भी महामृत्युंजय मंत्र को सबसे शक्तिशाली और जीवनदायी मंत्र माना जाता है। यह मंत्र भगवान शिव को समर्पित है और माना जाता है कि इसके जप से असमय मृत्यु, गंभीर रोग और अकाल संकट से मुक्ति मिलती है। शास्त्रों और पुराणों में ऐसे अनेक प्रसंग मिलते हैं, जहां संतों और ऋषियों ने इस मंत्र के प्रभाव से मृत्यु को भी परास्त कर दिया। आइए जानते हैं उन संतों की कुछ अद्भुत कहानियाँ, जिनसे यह सिद्ध होता है कि महामृत्युंजय मंत्र केवल एक साधना नहीं, बल्कि जीवन रक्षक शक्ति है।
मार्कंडेय ऋषि की कथा
महामृत्युंजय मंत्र से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा ऋषि मार्कंडेय की है। वे महर्षि मृकंडु और उनकी पत्नी मरुद्वती के पुत्र थे। दंपत्ति ने संतान के लिए घोर तपस्या की थी। उन्हें आशीर्वाद मिला कि पुत्र अल्पायु होगा। जब मार्कंडेय की आयु 16 वर्ष हुई, तो यमराज उन्हें लेने आए। उस समय युवा ऋषि भगवान शिव की उपासना में लीन होकर महामृत्युंजय मंत्र का जप कर रहे थे। वे शिवलिंग को पकड़कर मंत्रोच्चार करने लगे। कहा जाता है कि शिवलिंग से स्वयं महादेव प्रकट हुए और उन्होंने यमराज को रोक दिया। इस प्रकार मार्कंडेय को अमरत्व का वरदान मिला और वे मृत्यु पर विजय पाने वाले पहले ऋषि माने गए।
शुकदेव मुनि का प्रसंग
श्रीमद्भागवत महापुराण के प्रवक्ता शुकदेव मुनि, व्यास जी के पुत्र थे। उनके जीवन का उद्देश्य केवल भगवत भक्ति और ज्ञान था। जब राजा परीक्षित को मृत्यु का श्राप मिला, तब शुकदेव ने उन्हें सात दिनों तक भागवत कथा सुनाई। कथा के दौरान भी वे महामृत्युंजय मंत्र का जप करते रहे। कहा जाता है कि इस मंत्र की साधना से शुकदेव मुनि मृत्यु के भय से परे हो गए थे और उन्होंने जीवन-मृत्यु के बंधन से मुक्ति प्राप्त की।
रैवतक पर्वत के साधु
पौराणिक कथाओं में उल्लेख मिलता है कि रैवतक पर्वत पर एक साधु रहते थे। वे तपस्वी जीवन जीते और प्रतिदिन महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते थे। जब उन पर भयंकर रोग का आक्रमण हुआ और चिकित्सक ने हार मान ली, तब भी उन्होंने मंत्र का जाप जारी रखा। कुछ ही समय में वे पूर्ण स्वस्थ हो गए। यह कथा इस बात का प्रमाण है कि मंत्र के प्रभाव से रोग और मृत्यु दोनों पर विजय पाई जा सकती है।
स्वामी दयानंद सरस्वती की साधना
आधुनिक भारत के महान संत स्वामी दयानंद सरस्वती भी महामृत्युंजय मंत्र के साधक माने जाते हैं। कहा जाता है कि उन्होंने अपने जीवन में कई बार इस मंत्र का आश्रय लिया और गहरे संकटों से बाहर निकले। स्वामी जी का मानना था कि महामृत्युंजय मंत्र केवल शारीरिक मृत्यु ही नहीं, बल्कि अज्ञान और अंधविश्वास जैसी मानसिक मृत्यु को भी परास्त करता है।
संत तैलंग स्वामी का अनुभव
वाराणसी के महान योगी तैलंग स्वामी का जीवन भी महामृत्युंजय मंत्र से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि वे कई बार मृत समान अवस्था में चले जाते थे, लेकिन मंत्र की शक्ति से पुनः जीवित हो उठते थे। उनके शिष्यों ने कई बार इस चमत्कार को देखा। तैलंग स्वामी स्वयं कहते थे कि महामृत्युंजय मंत्र केवल जप नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के बीच संवाद का माध्यम है।
महामृत्युंजय मंत्र का महत्व
इन कहानियों से स्पष्ट होता है कि महामृत्युंजय मंत्र केवल मृत्यु से रक्षा करने वाला नहीं है, बल्कि यह जीवन को नई ऊर्जा देने वाला मंत्र है। यह साधना साधक को भय, रोग और संकट से मुक्त कर मानसिक शांति प्रदान करती है। आज भी अनेक संत और साधक इस मंत्र का जप कर जीवन को संबल और शक्ति प्रदान करते हैं।
Tagsमहामृत्युंजय मंत्रसंतों जान बचानेशक्तिशाली उपायMahamrityunjaya mantrasaints save livespowerful remedyजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताजनता से रिश्ता.कॉमआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperजनताjantasamachar newssamacharहिंन्दी समाचार
Next Story





