धर्म-अध्यात्म

भाद्रपद पूर्णिमा पर चमक सकता है भाग्य, शुभ मुहूर्त में करें ये उपाय

nidhi
26 Sept 2026 8:53 AM IST
भाद्रपद पूर्णिमा पर चमक सकता है भाग्य, शुभ मुहूर्त में करें ये उपाय
x
भाद्रपद पूर्णिमा पर करें स्नान-दान और पूजा
धर्म डेस्क: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। भाद्रपद माह की पूर्णिमा पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा, पवित्र नदी में स्नान, दान और चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक किए गए इन कार्यों से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना पूरी होती है।
इस वर्ष भाद्रपद पूर्णिमा 26 सितंबर 2026 को मनाई जा रही है। इसी दिन पूर्णिमा श्राद्ध भी किया जा रहा है। इसके अगले दिन यानी 27 सितंबर से प्रतिपदा श्राद्ध के साथ मुख्य पितृ पक्ष की शुरुआत होगी।
पूर्णिमा पर सुबह स्नान का महत्व
भाद्रपद पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने की परंपरा है। संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान किया जाता है। घर पर स्नान करने वाले लोग भी श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना कर सकते हैं। इसके बाद सूर्यदेव को जल अर्पित करने और भगवान विष्णु का ध्यान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पूर्णिमा के दिन स्नान के बाद जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दूसरी उपयोगी वस्तुओं का दान करना पुण्यकारी माना जाता है।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा
स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। पूजा में दीपक, फूल, फल और अन्य सात्विक सामग्री अर्पित की जा सकती है। कई श्रद्धालु भगवान विष्णु को तुलसी दल भी अर्पित करते हैं। घर में सुख-समृद्धि की कामना के साथ माता लक्ष्मी की आराधना की जाती है। धार्मिक परंपराओं में इस दिन सत्यनारायण भगवान की कथा और पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है।
शाम को चंद्रमा को अर्घ्य
पूर्णिमा की रात चंद्र दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है। चंद्रमा दिखाई देने के बाद जल से अर्घ्य देने की परंपरा है। कई लोग चंद्रदेव की पूजा कर परिवार में सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
दान करते समय रखें ध्यान
दान अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार करना चाहिए। धार्मिक परंपरा में अन्न, वस्त्र और जरूरत की वस्तुओं का दान महत्वपूर्ण माना गया है। दान का उद्देश्य जरूरतमंद की सहायता करना होना चाहिए। पूर्णिमा से जुड़ी पूजा और उपाय धार्मिक आस्था एवं परंपराओं पर आधारित हैं। इन्हें भाग्य बदलने की निश्चित गारंटी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा की विधि तथा मान्यताएं अलग हो सकती हैं।
भाद्रपद पूर्णिमा के साथ श्राद्ध कर्म का क्रम भी शुरू हो जाता है। जिन पूर्वजों की मृत्यु पूर्णिमा तिथि को हुई हो, उनका श्राद्ध इस दिन करने की परंपरा है। इसके बाद प्रतिपदा से पितृ पक्ष की अन्य श्राद्ध तिथियां शुरू होती हैं।
Next Story