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धर्म-अध्यात्म
महास्नान के बाद अस्वस्थ हुए भगवान जगन्नाथ, 15 दिन भक्तों से रहेंगे दूर
Tara Tandi
29 Jun 2026 5:54 PM IST

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ज्योतिष न्यूज़: ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा से पहले एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होता है, जिसे स्नान यात्रा के नाम से जाना जाता है। ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि पर महाप्रभु जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का विशेष स्नान करवाया जाता है, और इसी परंपरा के चलते इस दिन को स्नान पूर्णिमा भी कहा जाता है। साल 2026 में यह स्नान यात्रा आज, यानी 29 जून, सोमवार को मनाई जा रही है, जबकि भव्य रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 को निकाली जाएगी। रथ यात्रा से पहले भगवान को सुन कुएं के पवित्र जल से स्नान कराया जाता है, और इस महास्नान के बाद वे प्रतीकात्मक रूप से बीमार हो जाते हैं, जिसके चलते वे लगभग 15 दिनों तक एकांतवास में रहते हैं।
108 स्वर्ण कलशों से होता है भगवान का स्नान
स्नान यात्रा का यह उत्सव दरअसल विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को 108 कलशों के पवित्र जल से स्नान कराया जाता है। यह जल एक विशेष कुएं से लाया जाता है, जिसे साल में सिर्फ एक बार ही खोला जाता है। इस जल में कुछ खास जड़ी-बूटियां और इत्र मिलाकर तीनों देवी-देवताओं को स्नान कराया जाता है। स्नान के बाद भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाता है, और इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ गजवेश यानी हाथी के रूप में सज्जित होते हैं। इसके पीछे एक पुरानी कथा है। कहा जाता है कि भगवान गणेश के एक भक्त ने जब जगन्नाथ जी के दर्शन की कामना की, तो भगवान ने उन्हें गजानन के रूप में दर्शन दिए थे। उसी परंपरा का पालन करते हुए हर साल स्नान यात्रा के दिन भगवान गजवेश धारण करते हैं।
15 दिनों तक नहीं होंगे भगवान के दर्शन
इस भव्य स्नान के बाद महाप्रभु जगन्नाथ प्रतीकात्मक रूप से अस्वस्थ हो जाते हैं और 15 दिनों के लिए एकांतवास में चले जाते हैं। इस अवधि में श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन नहीं हो पाते। इस दौरान पुजारी भगवान को विभिन्न प्रकार के काढ़े का भोग लगाते हैं, जिससे यह परंपरा हमें यह संदेश देती है कि भगवान भी मनुष्य की तरह ही बीमार पड़ सकते हैं, और उन्हें भी औषधियों की आवश्यकता होती है। 15 दिनों के इस विश्राम काल के बाद भगवान पूर्ण स्वस्थ होकर नवयौवन रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।
इसके बाद शुरू होती है रथ यात्रा
स्वस्थ होने के बाद भगवान जगन्नाथ के लिए कई धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं, जिसके बाद भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा तीन भव्य और दिव्य रथों में सवार होकर गुंडिचा मंदिर के लिए प्रस्थान करते हैं। इन रथों की रस्सियों को खींचने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त इन रथों की रस्सियों को छू भी ले, उसे जीवन-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही इस रथ यात्रा के दर्शन करने से व्यक्ति के पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे सभी तीर्थों के दर्शन के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।
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