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धर्म-अध्यात्म
कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी आज: जानें पूजा विधि, चंद्रोदय समय और आरती के बोल
nidhi
3 July 2026 1:09 PM IST

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कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी 2026
Krishnapingala Sankashti Chaturthi 2026: आज, 3 जुलाई शुक्रवार को आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है, जिसे कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जा रहा है. यह पावन दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश को समर्पित है. धार्मिक मान्यता है कि जो भी भक्त इस दिन विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करता है और व्रत रखता है, उसके जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं तथा सुख, समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है.
कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी: शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय समय
चतुर्थी तिथि का प्रारंभ: 3 जुलाई 2026, सुबह 11:20 बजे से
चतुर्थी तिथि की समाप्ति: 4 जुलाई 2026, रात्रि 12:39 बजे तक
आज का चंद्रोदय समय: रात्रि 9:53 बजे (विभिन्न शहरों में स्थान के अनुसार समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है.)
कृष्णपिंगल गणपति पूजा विधि
इस दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें. इसके बाद उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. भगवान गणेश को सिंदूर, दूर्वा (दूब), अक्षत और पुष्प अर्पित करें. फिर उन्हें उनके प्रिय मोदक या बूंदी के लड्डुओं का भोग लगाएं. पूजा के दौरान ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करें. इसके बाद संकष्टी व्रत कथा और गणेश चालीसा का पाठ करें. अंत में भगवान गणेश की आरती करें. रात्रि में चंद्रमा के दर्शन के बाद उन्हें अर्घ्य अर्पित करें और फिर व्रत का पारण करें.
भगवान गणेश जी की आरती
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.
एकदंत दयावंत, चार भुजा धारी,
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी.
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.
पान चढ़े, फल चढ़े और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा.
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया,
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया.
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी,
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी.
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा.
भगवान गणेश जी की जय.
पार्वती नंदन की जय.
ॐ गं गणपतये नमः.
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