धर्म-अध्यात्म

जानें इंदिरा एकादशी का व्रत कब है? शुभ मुहूर्त और कथा

Tulsi Rao
13 Sep 2021 3:08 AM GMT
जानें इंदिरा एकादशी का व्रत कब है? शुभ मुहूर्त और कथा
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इंदिरा एकादशी को सभी एकादशी तिथियों में विशेष बताया गया है. सभी व्रतों में एकादशी का व्रत श्रेष्ठ माना गया है. एकादशी का व्रत सभी कष्टों को दूर करने वाला है

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। Indira Ekadashi 2021 Date: इंदिरा एकादशी को सभी एकादशी तिथियों में विशेष बताया गया है. सभी व्रतों में एकादशी का व्रत श्रेष्ठ माना गया है. एकादशी का व्रत सभी कष्टों को दूर करने वाला है. महाभारत की कथा में भी एकादशी व्रत का वर्णन मिलता है. पितृ में पड़ने वाली ये एकादशी कब है आइए जानते हैं-

इंदिरा एकादशी कब है?
पंचांग के अनुसार इंदिरा एकादशी का व्रत 02 अक्टूबर 2021, शनिवार को अश्विन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाएगा. इस दिन चंद्रमा कर्क राशि और नक्षत्र आश्लेषा रहेगा.
इंदिरा एकादशी 202- शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि प्रारम्भ- 01 अक्टूबर 2021 को 11:03 पी एम
एकादशी तिथि समाप्त- 02 अक्टूबर 2021 को 11:10 पी एम
इंदिरा एकादशी पारण का समय- 03 अक्टूबर 2021 को 06:15 ए एम से 08:37 ए एम तक
इंदिरा एकादशी का महत्व
पितृ पक्ष 20 सितंबर 2021 से आरंभ हो रहे हैं. पंचांग के अनुसार पितृ पक्ष यानि श्राद्ध का समापन 06 अक्टूबर 2021 को हो रहा है. 02 अक्टूबर को इंदिरा एकादशी का व्रत है. पितृ पक्ष में इस एकादशी का व्रत रखने से पितृ प्रसन्न होते हैं और जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं. यह व्रत पापों से भी मुक्ति दिलाता है. इंदिरा एकादशी का व्रत रखने से पितरों को मोक्ष प्राप्त होता है. एक पौराणिक कथा के अनुसार सतयुग में महिष्मती राज्य के राजा इंद्रसेन ने अपने पिता को इंदिरा एकादशी का उपवास रखकर स्वर्ग लोक में स्थान दिलाया था.
इंदिरा एकादशी व्रत की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार इंद्रसेन नाम के राजा अपने गुणों के कारण बहुत लोकप्रिय थे. वे भगवान विष्णु के परम भक्त भे. एक दिन नारद जी इंद्रसेन के राज्य में पधारे और उन्हें उनके पिता की मृत्यु के बाद की दयनीय स्थिति के बारे में जानकारी प्रदान की. नारद जी ने उनके पिता का संदेश भी इंद्रसेन को सुनाया. इसके बाद नारद जी ने इंद्रसेन को इंदिरा एकादशी पर व्रत रखने की सलाह दी. इसके साथ ही विधि पूर्वक व्रत का पारण कर, दान आदि का कार्य करने के लिए भी कहा. नारद जी के कहे अनुसार ही राजा ने एकादशी का व्रत रखा और विधि पूर्वक अगले दिन एकादशी व्रक का पारण किया. इस व्रत को करने से राजा के पिता को मोक्ष प्राप्त हुआ


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