धर्म-अध्यात्म

धनतेरस पर लक्ष्मी जी की मूर्ति खरीदने से पहले जान लें ये बातें

Rajeshwari Nishad
4 Nov 2026 4:10 PM IST
धनतेरस पर लक्ष्मी जी की मूर्ति खरीदने से पहले जान लें ये बातें
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Dhanteras 2026: हिंदू धर्म में धनतेरस का त्योहार सुख-समृद्धि, धन और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। दिवाली से पहले मनाए जाने वाले इस पर्व पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि धनतेरस के दिन शुभ वस्तुओं की खरीदारी और विधि-विधान से पूजा करने पर घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस दिन सोना, चांदी, बर्तन और अन्य उपयोगी वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। हालांकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति सोना-चांदी नहीं खरीद सकता, तो पीली कौड़ी और गोमती चक्र जैसी वस्तुओं को भी पूजा में शामिल कर सकता है।
धनतेरस पर मां लक्ष्मी की मूर्ति खरीदते समय भी कुछ विशेष बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। धार्मिक परंपराओं में माता लक्ष्मी की बैठी हुई और सौम्य मुद्रा वाली प्रतिमा को गृहस्थ जीवन के लिए शुभ माना गया है। वहीं, पीली कौड़ी और गोमती चक्र से जुड़े कुछ पारंपरिक उपाय भी प्रचलित हैं। आइए जानते हैं कि धनतेरस पर माता लक्ष्मी की कैसी मूर्ति खरीदनी चाहिए और इन वस्तुओं का धार्मिक महत्व क्या है।
धनतेरस पर मां लक्ष्मी की कैसी मूर्ति खरीदें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर माता लक्ष्मी की मूर्ति खरीदते समय उनकी मुद्रा पर विशेष ध्यान देना चाहिए। घर में पूजा के लिए कमल के फूल पर विराजमान और शांत मुद्रा में बैठी माता लक्ष्मी की प्रतिमा को शुभ माना जाता है।माना जाता है कि बैठी हुई मुद्रा स्थिरता, शांति और समृद्धि का प्रतीक है। ऐसी प्रतिमा घर में स्थापित करने से परिवार में सुख-शांति और सकारात्मक वातावरण बना रहने की कामना की जाती है।इसके विपरीत, कुछ पारंपरिक मान्यताओं में माता लक्ष्मी की खड़ी मुद्रा वाली प्रतिमा को नियमित गृहस्थ पूजा के लिए कम प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि यह धार्मिक परंपराओं से जुड़ी धारणा है और अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा की मान्यताएं भिन्न हो सकती हैं।
माता लक्ष्मी के चेहरे पर हो सौम्य भाव
धनतेरस पर मूर्ति खरीदते समय माता लक्ष्मी के चेहरे की भाव-भंगिमा भी देखनी चाहिए। धार्मिक विश्वास के अनुसार, माता लक्ष्मी की प्रतिमा में मुस्कुराता हुआ चेहरा, शांत भाव और आशीर्वाद देने वाली मुद्रा शुभ मानी जाती है।ऐसी प्रतिमा को प्रेम, संतोष और सौहार्द का प्रतीक माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार माता लक्ष्मी की मूर्ति खरीदकर पूजा स्थान पर स्थापित करते हैं।इसके अलावा प्रतिमा साफ-सुथरी, बिना टूटी-फूटी और सुंदर बनावट वाली होनी चाहिए। मूर्ति का चुनाव करते समय अपनी आर्थिक स्थिति और पूजा स्थान के आकार का भी ध्यान रखना चाहिए।
कमल पर विराजमान मां लक्ष्मी की प्रतिमा का महत्व
हिंदू धार्मिक परंपराओं में कमल के फूल को पवित्रता, सौंदर्य और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना गया है। माता लक्ष्मी को अक्सर कमल पर विराजमान दिखाया जाता है।मान्यता है कि कमल का फूल कठिन परिस्थितियों में भी पवित्रता और संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देता है।धनतेरस पर कमल पर बैठी माता लक्ष्मी की प्रतिमा खरीदने वाले श्रद्धालु इसे सुख-समृद्धि और मंगलकामना से जोड़कर देखते हैं।पूजा के दौरान माता लक्ष्मी को फूल, दीपक, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। कई परिवारों में लक्ष्मी-गणेश की संयुक्त प्रतिमा खरीदने की भी परंपरा है।
सोना-चांदी नहीं खरीद सकते तो लें पीली कौड़ी
धनतेरस पर सोना और चांदी खरीदने की परंपरा काफी पुरानी है। लेकिन हर परिवार के लिए कीमती धातुओं की खरीदारी करना संभव नहीं होता।ऐसे में धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीली कौड़ी को शुभ वस्तु माना जाता है। कौड़ी का संबंध कई लोकपरंपराओं में माता लक्ष्मी और धन-समृद्धि से जोड़ा जाता है।धनतेरस पर श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार पीली कौड़ी खरीदकर पूजा में रख सकते हैं।कुछ घरों में पांच, सात या ग्यारह कौड़ियां रखने की परंपरा है। हालांकि इनकी संख्या को लेकर कोई एक सार्वभौमिक धार्मिक नियम नहीं है।श्रद्धालु कौड़ियों को साफ करके माता लक्ष्मी के सामने रखते हैं और पूजा के बाद उन्हें लाल या पीले कपड़े में बांधकर सुरक्षित स्थान पर रख देते हैं।
पीली कौड़ी का पारंपरिक उपाय
धनतेरस की पूजा के दौरान पीली कौड़ियों को माता लक्ष्मी के चरणों के पास रखने की परंपरा कुछ क्षेत्रों में प्रचलित है।पूजा के बाद इन कौड़ियों को घर की तिजोरी, अलमारी या उस स्थान पर रखा जाता है, जहां परिवार अपनी बचत और महत्वपूर्ण वस्तुएं रखता है।धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से धन के प्रति सम्मान और बचत की भावना बनी रहती है।हालांकि यह स्पष्ट समझना जरूरी है कि कौड़ी रखने से धन बढ़ने या आर्थिक लाभ होने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसे श्रद्धा और परंपरा से जुड़ा प्रतीकात्मक उपाय माना जाना चाहिए।
गोमती चक्र क्यों माना जाता है शुभ?
धनतेरस पर गोमती चक्र खरीदने की भी परंपरा है। गोमती चक्र एक प्राकृतिक शंखनुमा वस्तु है, जिसके एक ओर गोलाकार आकृति दिखाई देती है।लोकमान्यताओं में इसका संबंध भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी से जोड़ा जाता है। कई श्रद्धालु इसे शुभता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानते हैं।धनतेरस के अवसर पर गोमती चक्र को पूजा सामग्री में शामिल किया जाता है। पूजा के बाद इसे घर के मंदिर या तिजोरी में रखने की परंपरा भी है।कुछ मान्यताओं में ग्यारह गोमती चक्रों को विशेष महत्व दिया जाता है। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों में इनकी संख्या और पूजा विधि भिन्न हो सकती है।
गोमती चक्र का ऐसे करें पूजन
धनतेरस के दिन गोमती चक्र का पारंपरिक पूजन करने के लिए सबसे पहले पूजा स्थान को साफ किया जाता है।इसके बाद माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। गोमती चक्र को स्वच्छ जल से साफ करके पूजा की थाली में रखा जा सकता है।श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार चंदन, अक्षत और फूल अर्पित करते हैं। इसके बाद माता लक्ष्मी की आरती की जाती है।पूजा समाप्त होने पर गोमती चक्र को लाल या पीले कपड़े में रखकर सुरक्षित स्थान पर रखा जा सकता है।
धनतेरस पर खरीदारी करते समय इन बातों का रखें ध्यान
धनतेरस पर खरीदारी करते समय अपनी आर्थिक क्षमता का ध्यान रखना भी जरूरी है। धार्मिक परंपराएं श्रद्धा और सकारात्मक भावनाओं से जुड़ी होती हैं। इसलिए केवल शुभ मान्यता के कारण महंगी वस्तुएं खरीदना आवश्यक नहीं है।सोना-चांदी, बर्तन, दीपक, पूजा सामग्री या घर की जरूरत की कोई उपयोगी वस्तु अपनी क्षमता के अनुसार खरीदी जा सकती है।
धनतेरस का वास्तविक संदेश स्वास्थ्य, संतोष, स्वच्छता और समृद्ध जीवन की कामना से जुड़ा है। इस दिन घर की साफ-सफाई, दीपदान, पूजा और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना भी अच्छी परंपराएं मानी जाती हैं।धार्मिक विश्वास के अनुसार, माता लक्ष्मी की सौम्य और बैठी हुई प्रतिमा, पीली कौड़ी तथा गोमती चक्र को पूजा में शामिल करना शुभ माना जाता है। लेकिन परिवार की वास्तविक आर्थिक समृद्धि के लिए मेहनत, बचत और समझदारी से धन का प्रबंधन करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
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