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धर्म-अध्यात्म
बप्पा की विदाई से पहले जान लें गणेश विसर्जन के जरूरी नियम
nidhi
25 Sept 2026 11:28 AM IST

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गणेश प्रतिमाएं करनी होती हैं विसर्जित
गणेश उत्सव के दौरान घरों और पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है। पूजा-अर्चना के बाद अनंत चतुर्दशी या अपनी परंपरा के अनुसार निर्धारित दिन पर गणपति विसर्जन किया जाता है। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल रहता है कि क्या घर में मौजूद हर गणेश प्रतिमा का विसर्जन करना जरूरी है? धार्मिक परंपराओं के अनुसार इसका जवाब प्रतिमा की स्थापना और पूजा के उद्देश्य पर निर्भर करता है।
गणेश चतुर्थी पर जब मिट्टी की नई प्रतिमा को विशेष रूप से उत्सव के लिए लाकर विधि-विधान से स्थापित किया जाता है, तब पूजा की निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद उसका विसर्जन करने की परंपरा है। स्थापना के समय भगवान गणेश का आह्वान किया जाता है और अंतिम दिन पूजा के बाद विदाई की जाती है। इसी प्रक्रिया को गणपति विसर्जन कहा जाता है।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि घर में पहले से पूजा स्थान पर रखी हर गणेश प्रतिमा का विसर्जन करना जरूरी है। अगर घर के मंदिर में धातु, पत्थर, पीतल, चांदी या किसी अन्य टिकाऊ सामग्री की गणेश प्रतिमा नियमित पूजा के लिए स्थापित है, तो उसे गणेश उत्सव समाप्त होने पर विसर्जित नहीं किया जाता। ऐसी प्रतिमा घर के मंदिर में बनी रह सकती है और नियमित रूप से उसकी पूजा की जा सकती है। मुख्य अंतर अस्थायी और स्थायी स्थापना का है। गणेश चतुर्थी के अवसर पर सीमित दिनों के लिए लाई गई पार्थिव यानी मिट्टी की प्रतिमा का परंपरागत रूप से विसर्जन किया जाता है। वहीं घर के पूजा स्थान में स्थायी रूप से रखी प्रतिमा को हर साल विसर्जित करने की आवश्यकता नहीं मानी जाती।
कई परिवार डेढ़ दिन, तीन दिन, पांच दिन, सात दिन या दस दिन तक गणपति की स्थापना करते हैं। पूजा की अवधि परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद पूजा और आरती कर बप्पा को विदाई दी जाती है।
आज पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए घर पर विसर्जन का विकल्प भी अपनाया जाता है। छोटी मिट्टी की प्रतिमा को साफ पानी से भरे बड़े पात्र में विसर्जित किया जा सकता है। प्रतिमा पूरी तरह घुलने के बाद उस मिट्टी और पानी का उपयोग पौधों में किया जा सकता है। इससे धार्मिक परंपरा निभाने के साथ जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने में भी मदद मिलती है। प्लास्टर ऑफ पेरिस और रासायनिक रंगों वाली प्रतिमाओं को प्राकृतिक जल स्रोतों में विसर्जित करने से पर्यावरण को नुकसान हो सकता है। इसलिए मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनी पर्यावरण अनुकूल प्रतिमा को प्राथमिकता देना बेहतर विकल्प माना जाता है। स्थानीय प्रशासन की ओर से बनाए गए कृत्रिम विसर्जन कुंडों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस तरह हर गणेश प्रतिमा का विसर्जन जरूरी नहीं है। मुख्य रूप से गणेश उत्सव के लिए अस्थायी रूप से स्थापित पार्थिव प्रतिमा की पूजा पूरी होने के बाद विसर्जन की परंपरा है। घर के मंदिर में स्थायी पूजा के लिए रखी गणेश प्रतिमा को वहीं रखा जा सकता है। अलग-अलग परिवारों और संप्रदायों की परंपराओं में अंतर संभव है, इसलिए विशेष धार्मिक विधि के लिए अपनी पारिवारिक परंपरा या जानकार आचार्य का मार्गदर्शन लिया जा सकता है।
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