धर्म-अध्यात्म

जानिए सावन स्कंद षष्ठी व्रत की तिथि, पूजा मुहूर्त और योग

Mahima Marko
27 July 2022 4:38 AM GMT
जानिए सावन स्कंद षष्ठी व्रत की तिथि, पूजा मुहूर्त और योग
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सावन मा​ह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को स्कंद षष्ठी व्रत रखा जाएगा. यह व्रत 03 अगस्त दिन बुधवार को है

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। सावन मा​ह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को स्कंद षष्ठी व्रत रखा जाएगा. यह व्रत 03 अगस्त दिन बुधवार को है. स्कंद षष्ठी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती के बड़े पुत्र भगवान कार्तिकेय की पूजा विधि विधान से की जाती है. सावन माह में शिव परिवार की पूजा करना महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह माह शिव जी का प्रिय माह है और चार मा​ह तक सृष्टि का संचालन भगवान शिव के हाथों में ही रहता है. पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र से जानते हैं सावन स्कंद षष्ठी व्रत की तिथि, पूजा मुहूर्त, योग आदि के बारे में.

सावन स्कंद षष्ठी व्रत 2022 तिथि
पंचांग के अनुसार, श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि का प्रारंभ 03 अगस्त को प्रात: 05 बजकर 41 मिनट पर हो रहा है और यह तिथि 04 अगस्त को प्रात: 05 बजकर 40 मिनट तक मान्य रहेगी. उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, सावन स्कंद षष्ठी व्रत 03 अगस्त को रखा जाएगा.
सावन स्कंद षष्ठी 2022 मुहूर्त
03 अगस्त को स्कंद षष्ठी व्रत के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग बना हुआ है. सिद्ध और साध्य योग के साथ हस्त और चित्रा नक्षत्र भी हैं. ये सभी योग और नक्षत्र शुभ माने जाते हैं. स्कंद षष्ठी के दिन सिद्ध योग सुबह से लेकर शाम 05 बजकर 49 मिनट तक है और उसके बाद से साध्य योग प्रारंभ हो जाएगा.
सावन स्कंद षष्ठी वाले दिन सर्वार्थ सिद्धि योग प्रात: 05 बजकर 43 मिनट से लेकर शाम 06 बजकर 24 मिनट तक है. वहीं अमृत सिद्धि योग सुबह 05 बजकर 43 मिनट से लेकर सुबह 09 बजकर 51 मिनट तक है. उसके बाद शाम को 06 बजकर 24 मिनट से अगले दिन 04 अगस्त को प्रात: 05 बजकर 44 मिनट तक है.
ऐसे में देखा जाए तो स्कंद षष्ठी के दिन प्रात:काल से ही शुभ योग बने हुए हैं. हालांकि इस दिन का कोई शुभ समय या अभिजित मुहूर्त नहीं है. इस दिन राहुकाल दोहपर 12 बजकर 27 मिनट से दोपहर 02 बजकर 08 मिनट तक है.
स्कंद षष्ठी व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी स्कंद षष्ठी का व्रत करता है, उसके अंदर लोभ, मोह, क्रोध और अहंकार जैसी बुराइयों का अंत हो जाता है. भगवान कार्तिकेय की कृपा से उस व्यक्ति को रोग, दोष और शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिल जाती है.
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