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धर्म-अध्यात्म
जानिए भाद्रपद 2022 के व्रत और त्योहारों के बारे में....
Tara Tandi
10 Aug 2022 10:44 AM IST

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हिंदू कैलेंडर का छठां माह भाद्रपद (Bhadrapada) का प्रारंभ 12 अगस्त दिन शुक्रवार से हो रहा है
जनता से रिश्ता वेबडेस्क। हिंदू कैलेंडर का छठां माह भाद्रपद (Bhadrapada) का प्रारंभ 12 अगस्त दिन शुक्रवार से हो रहा है. इस दिन भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि है. भाद्रपद माह में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (Janmashtami), हरतालिका तीज, गणेश चतुर्थी, राधा अष्टमी, अनंत चतुर्दशी, कजरी तीज, भाद्रपद अमावस्या, भाद्रपद पूर्णिमा, मासिक शिवरात्रि, प्रदोष व्रत, ऋषि पंचमी जैसे कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार आने वाले हैं. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट से जानते हैं भाद्रपद 2022 के व्रत और त्योहारो के बारे में.
भाद्रपद 2022 का प्रारंभ
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह का प्रारंभ 12 अगस्त से हो रहा है. भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ 12 अगस्त शुक्रवार को प्रात: 05 बजकर 58 मिनट से हो रहा है. इस दिन सौभाग्य योग और शोभन योग है.
भाद्रपद 2022 व्रत और त्योहार
12 अगस्त, दिन: शुक्रवार: भाद्रपद माह प्रारंभ, कृप्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि
14 अगस्त, दिन: रविवार: कजरी तीज, बूढ़ी तीज या सातूड़ी तीज
15 अगस्त, दिन: सोमवार: बहुला चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी व्रत
17 अगस्त, दिन: बुधवार: सिंह संक्रांति
18 अगस्त, दिन: गुरुवार: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
23 अगस्त, दिन: मंगलवार: अजा एकादशी
24 अगस्त, दिन: बुधवार: प्रदोष व्रत
25 अगस्त, दिन: गुरुवार: मासिक शिवरात्रि
27 अगस्त, दिन: शनिवार: भाद्रपद अमावस्या
28 अगस्त, दिन: रविवार: भाद्रपद शुक्ल पक्ष प्रारंभ
30 अगस्त, दिन: मंगलवार: हरतालिका तीज
31 अगस्त, दिन: बुधवार: गणेश चतुर्थी
01 सितंबर, दिन: गुरुवार: ऋषि पंचमी
04 सितंबर, दिन: रविवार: राधा अष्टमी
06 सितंबर, दिन: मंगलवार: परिवर्तिनी एकादशी
08 सितंबर, दिन: गुरुवार: प्रदोष व्रत, ओणम
09 सितंबर, दिन: शुक्रवार: अनंत चतुर्दशी, गणेश विसर्जन
10 सितंबर, दिन: शनिवार: भाद्रपद पूर्णिमा व्रत, पितृ पक्ष प्रारंभ
भाद्रपद माह में मासिक व्रतों के अलावा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, हरतालिका तीज, गणेश चतुर्थी, अनंत चतुर्दशी, राधा अष्टमी का लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है. यह पूरे वर्ष में एक बार आने वाले व्रत और उत्सव हैं. भाद्रपद माह की अंतिम तिथि यानि भाद्रपद पूर्णिमा पितरों के लिए महत्वपूर्ण होती है. इस तिथि से पितरों को समर्पित पितृपक्ष प्रारंभ होता है
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