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धर्म-अध्यात्म
जानिए वरुथिनी एकादशी की तिथि और व्रत के नियमों के बारे में
Ritisha Jaiswal
21 April 2025 4:29 PM IST

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वैशाख मास
Varuthini Ekadashi 2025: वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को वरूथिनी एकादशी का व्रत आयोजित किया जाता है. इस व्रत का पालन करने और विधिपूर्वक भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन में सुख और समृद्धि में वृद्धि होती है, साथ ही कठिनाइयों से मुक्ति भी मिलती है. आइए जानें इस दिन किन कार्यों को नहीं करना चाहिए.
Varuthini Ekadashi 2025: वरुथिनी एकादशी एक विशेष शुभ तिथि है, जो वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है, और व्रत रखने से व्यक्ति अपने पापों से मुक्ति प्राप्त कर सकता है. यह विश्वास किया जाता है कि इस व्रत के माध्यम से जीवन में सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है. हालांकि, व्रत का पूरा फल तभी प्राप्त होता है जब इसे सही विधि और नियमों के अनुसार किया जाए. अक्सर लोग कुछ सामान्य गलतियाँ कर देते हैं, जिससे व्रत का पुण्य कम हो सकता है. आइए जानते हैं उन गलतियों के बारे में, जिन्हें इस एकादशी व्रत के दौरान नहीं करना चाहिए.
वरुथिनी एकादशी की तिथि
पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 23 अप्रैल, बुधवार को शाम 4 बजकर 43 मिनट पर प्रारंभ होगी और इसका समापन अगले दिन 24 अप्रैल, गुरुवार को दोपहर 2 बजकर 32 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार, वरुथिनी एकादशी का व्रत 24 अप्रैल को रखा जाएगा.
व्रत के नियमों का पालन
वरुथिनी एकादशी के दिन व्रत करने वाले व्यक्तियों को पूर्ण संयम बनाए रखना चाहिए. इस दिन व्रत के दौरान झूठ बोलना, अपशब्दों का उपयोग करना, क्रोध करना या किसी का अपमान करना वर्जित है. मानसिक और शारीरिक शुद्धता इस दिन अत्यंत आवश्यक होती है.
अन्न और तामसिक भोजन से परहेज
एकादशी व्रत के दौरान अनाज, चावल, दाल, मांस, मछली, लहसुन और प्याज जैसे तामसिक खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए. केवल फल, दूध, सूखे मेवे और व्रत में अनुमोदित खाद्य पदार्थों का ही सेवन करें.
ब्रह्मचर्य का पालन
व्रत के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य है. किसी भी प्रकार की शारीरिक या मानसिक इच्छाओं से दूर रहना चाहिए, ताकि व्रत की ऊर्जा और पवित्रता बनी रहे.
दिनभर सोना और आलस्य करना
एकादशी के दिन अधिक सोना वर्जित है. यह दिन जागरण, भजन-कीर्तन और भगवान के ध्यान में लीन रहने का होता है. आलस्य व्रत के पुण्य को घटा सकता है.
दान-पुण्य से दूर रहना
इस दिन दान देना अत्यंत लाभकारी होता है. कुछ लोग केवल व्रत रखते हैं, लेकिन दान नहीं करते. भोजन, वस्त्र, धन या जरूरतमंदों की सहायता करना व्रत की पूर्णता को दर्शाता है.
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