धर्म-अध्यात्म

सफलता की कुंजी: प्रतिस्पर्धा में बदलते रहें दांव-पेंच, रणनीति से मिल सकती है मात

Kunti Dhruw
21 Jun 2021 3:35 PM GMT
सफलता की कुंजी: प्रतिस्पर्धा में बदलते रहें दांव-पेंच, रणनीति से मिल सकती है मात
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जीवन सरल है. सहजता से व्यक्ति आगे बढ़ सकता है.

जीवन सरल है. सहजता से व्यक्ति आगे बढ़ सकता है. इस सहजता में भी आवश्यक बदलाव बनाए रखने की नीति ही सफलता का सर्वाेत्तम सूत्र है. कहा भी गया है कि सीधे पेड़ जल्दी काटे जाते हैं. इसलिए जरूरी है, हर महत्वपूर्ण कदम में नयापन बनाए रखने का प्रयास करें. इससे विरोधी आपके प्रयासों का आंकलन नहीं कर पाएगा. उसकी यह चूक ही आपकी सफलता की पहली सीढ़ी होगी. खेल मैदान हो या युद्ध का क्षेत्र, रणनीतिकार का दायित्व है कि वह अपने दांव-पेचों को अनोखे ढंग से सजाए. ऐसा किए बिना जीत की प्राप्ति दुष्कर है. जीत की पहली शर्त ही यह होती है कि विरोधी आपके कार्य व्यवहार का उचित आंकलन न कर पाए.

इसका सबसे बेहतर प्रयोग आज के दौर में वाणिज्यिक क्षेत्र में देखने का मिलता है. आज प्रत्यक्ष युद्ध कम होते हैं. अप्रत्यक्ष प्रतिस्पधाएं अधिक होती हैं. व्यापार में खरीदी बिक्री से लेकर मांग पूर्ति और दाम के मूल्यांकन में नवीन ढंगों से ही बात बनती है. इस कारण, सहज मन मस्तिष्क के लोग अथक मेहनत के बावजूद कारोबार में असफल हो जाते हैं. लाभ में वही रहते हैं जो औरों से आगे और बेहतर सोचते हैं. विचारों को अमल में लाते हैं.
नवाचार में व्यक्ति की स्वयं की एप्रोच ही काम करती है. शिक्षा, अनुभव, सलाह और गुरुज्ञान सहयोगी अवश्य होते हैं. स्वयं की बुद्धि ही अंतिम निर्णय करती है. राजा की तरह युद्धक्षेत्र में सफलता बनाए रखने के लिए जरूरी है कि उपलब्ध संसाधनों का हर बार अनोखे अंदाज में विरोधी के सामने लाकर उसे धूल चटा दें. ऐसा न कर पाने की स्थिति में वह दुर्याेधन की तरह परास्त ही होगा. फिर चाहे उसके साथ दुनिया की सबसे विशाल सेना और सामर्थ्य योद्धाओं की फौज ही क्यों न हो.
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