धर्म-अध्यात्म

Karwa Chauth Vrat पारण विधि: चांद देखने के बाद ऐसे करें व्रत का समापन

Harrison
10 Oct 2025 7:03 PM IST
Karwa Chauth Vrat पारण विधि: चांद देखने के बाद ऐसे करें व्रत का समापन
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Religion Spirituality, धर्म अध्यात्म : करवा चौथ, विवाहित स्त्रियों के लिए एक पावन और भावनात्मक पर्व है, जो पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखमय वैवाहिक जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जल और निराहार व्रत रखती हैं।
व्रत की पूर्णता तब मानी जाती है जब रात्रि में चंद्रमा के दर्शन के बाद विशेष पारंपरिक विधि से व्रत का "पारण" (समापन) किया जाता है।
बहुत सी महिलाएं इस बात को लेकर असमंजस में रहती हैं कि चांद देखने के बाद व्रत खोलने की सही और शुद्ध विधि क्या है। इस लेख में हम बता रहे हैं कि करवा चौथ का व्रत किस प्रकार विधिपूर्वक पूर्ण किया जाए।
चंद्रमा का महत्व
हिंदू धर्म में चंद्रमा को शीतलता, शांति और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। करवा चौथ के दिन चंद्र देव को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। मान्यता है कि चंद्रमा को देखकर और उन्हें जल अर्पित करने के बाद व्रती महिला का व्रत पूर्ण माना जाता है और वह फल की अधिकारी बनती है।
करवा चौथ व्रत पारण विधि – स्टेप बाय स्टेप
1. करवा और पूजा की थाली तैयार करें
चांद निकलने से पहले व्रती स्त्री को एक थाली में करवा (मिट्टी या पीतल का छोटा घड़ा), दीपक, चावल, रोली, मिठाई, और एक छलनी रखना चाहिए। थाली को सजाएं और दीपक जलाएं।
2. चांद निकलने की प्रतीक्षा करें
चांद निकलने के समय महिलाएं आंगन, छत या बालकनी में एकत्र होती हैं और चांद का इंतजार करती हैं। चंद्रमा के दर्शन के लिए छलनी या पानी का पात्र भी तैयार रखें।
3. चांद को अर्घ्य दें
जब चंद्रमा दिख जाए, तो पहले उसे छलनी से देखें।
फिर अपने पति को उसी छलनी से देखें।
चांद को जल से अर्घ्य दें। अर्घ्य देने के लिए एक पात्र में जल, चावल, फूल आदि डालें और उसे धीरे-धीरे चंद्रमा की ओर अर्पित करें।
4. पति के हाथों से पहला निवाला खाएं
व्रत का सबसे भावनात्मक क्षण तब होता है जब पति पत्नी को पहला निवाला (पानी और मिठाई) अपने हाथों से खिलाता है। इससे व्रत पूर्ण होता है।
5. पति का आशीर्वाद लें
व्रत खोलने के बाद पति से लंबी उम्र का आशीर्वाद लें और उनसे प्रेम एवं विश्वास का वचन पाएं। यह क्षण दांपत्य संबंधों को और मजबूत बनाता है।
पारण के समय ध्यान रखने योग्य बातें
पारण केवल चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही करें। उससे पहले भोजन या पानी ग्रहण न करें।
व्रत खोलते समय शुद्धता और सात्विकता का ध्यान रखें।
भोजन हल्का और सुपाच्य होना चाहिए – जैसे फल, मिठाई, खिचड़ी या हलवा-पूरी।
कुछ परंपराओं में सास द्वारा दिए गए सरगी की थाली से व्रत खोलना शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यता
पुराणों में उल्लेख है कि करवा चौथ का व्रत सावित्री, सीता और पार्वती जैसी पतिव्रता स्त्रियों की परंपरा को दर्शाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन श्रद्धा से व्रत करने पर स्त्री को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
करवा चौथ का व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्यार, समर्पण और आस्था का प्रतीक है। चंद्रमा को देखकर व्रत का पारण करने की यह परंपरा पति-पत्नी के रिश्ते में भावनात्मक गहराई और मजबूत विश्वास का संदेश देती है।
जो भी स्त्रियां इस व्रत को रखती हैं, उनके लिए यह जानना आवश्यक है कि पारण की विधि न केवल परंपरा का हिस्सा है, बल्कि इससे व्रत का पुण्यफल भी पूर्ण होता है।
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