धर्म-अध्यात्म

Karni Mata Temple: श्राप की रहस्यमयी कथा और मंदिर का रहस्य

Tara Tandi
28 April 2025 1:32 PM IST
Karni Mata Temple: श्राप की रहस्यमयी कथा और मंदिर का रहस्य
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Karni Mata Temple ज्योतिष न्यूज़ : नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही देशभर में स्थित शक्तिपीठों में विशेष पूजा-अर्चना भी शुरू हो गई है। नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही अलवर के सरिस्का के बफर रेंज में स्थित करणी माता मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचने लगे हैं। करणी माता मंदिर की स्थापना अलवर के महाराजा बख्तावर सिंह ने की थी। इतिहासकारों के अनुसार महाराजा बख्तावर सिंह ने शिकार के दौरान मिले श्राप के बाद स्वास्थ्य लाभ मिलने पर इस मंदिर की स्थापना की थी। अरावली की वादियों में स्थित इस मंदिर के आसपास सरिस्का के तीन बाघ भी विचरण करते हैं। करणी माता को चारण समुदाय की देवी के रूप में पूजा जाता है।
एक पीर ने दिया था श्राप: इतिहासकार हरिशंकर गोयल बताते हैं कि शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर बाला किला स्थित करणी माता मंदिर का निर्माण महाराजा बख्तावर सिंह ने कराया था। इसके बाद इसे पूजा-अर्चना के लिए महंत को उपहार में दे दिया गया था। तब से लेकर अब तक इसी परिवार की पीढ़ियां मंदिर में पूजा-अर्चना करती आ रही हैं। उन्होंने बताया कि एक दिन महाराजा बख्तावर सिंह शिकार के लिए गए थे, इस दौरान उन्होंने एक जानवर का शिकार किया। महाराज द्वारा किया गया शिकार पीर के तकिए पर गिर गया। यह देखकर पीर क्रोधित हो गए और उन्होंने महाराजा बख्तावर सिंह से तकिया साफ करवाने को कहा, लेकिन महाराजा ने पीर की बात नहीं मानी और आगे बढ़ गए। अपनी बात को अनसुना होते देख पीर ने महाराजा बख्तावर सिंह को श्राप दे दिया।
महारानी की सलाह पर की माता की पूजा: इसके चलते महाराजा बख्तावर सिंह की तबीयत खराब रहने लगी और कुछ समय बाद महाराजा के पेट में तेज दर्द होने लगा। तमाम उपचार करने के बाद भी जब महाराजा को पेट दर्द से राहत नहीं मिली तो महाराजा बख्तावर सिंह की संरक्षिका और महारानी रूप कंवर ने उन्हें करणी माता की पूजा करने को कहा। महारानी रूप कंवर भी बीकानेर के देशनोक में स्थित करणी माता की उपासक थीं। महाराजा बख्तावर सिंह ने संरक्षिका और महारानी रूप कंवर की बात मानकर करणी माता की पूजा शुरू कर दी। मान्यता थी कि अगर करणी माता किसी की बात मान लेती हैं तो उस व्यक्ति को सफेद चील दिखाई देती है। महाराजा बख्तावर सिंह द्वारा करणी माता की पूजा शुरू करने के कुछ समय बाद महाराजा बख्तावर सिंह ने महल पर सफेद चील को देखा।
इसके बाद राजा का स्वास्थ्य ठीक हो गया। इतिहासकार हरिशंकर गोयल ने बताया कि जब राजा का स्वास्थ्य पूरी तरह ठीक हो गया तो महाराज के दीवान उम्मेद सिंह ने बीकानेर के देशनोक में स्थित करणी माता मंदिर में चांदी के दरवाजे भेंट किए। करणी माता मंदिर का निर्माण महाराजा बख्तावर सिंह ने अलवर में करवाया था। यह मंदिर वर्तमान में सरिस्का टाइगर रिजर्व की बफर रेंज में स्थित है। मंदिर के रास्ते में कई बार बाघ भी देखे गए हैं। अलवर में करणी माता मंदिर के महंत लोकेश ने बताया कि श्रद्धालुओं को माता के दर्शन सिर्फ चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि में ही होते हैं। इस दौरान रोजाना हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में पहुंचकर करणी माता के दर्शन करते हैं। जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं को सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक मंदिर में दर्शन की अनुमति दी है। भक्तजन यहां आकर अपनी मन्नत का धागा बांधते हैं।
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