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धर्म-अध्यात्म
Kanwar Yatra 2026: कब शुरू होगी यात्रा, जानें तिथि और महत्व
Tara Tandi
7 Jun 2026 5:29 PM IST

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Kanwar Yatra ज्योतिष न्यूज़: सनातन धर्म में कांवड़ यात्रा भगवान शिव के प्रति आस्था, श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है। हर वर्ष सावन माह के आगमन के साथ लाखों शिव भक्त गंगा तटों की ओर प्रस्थान करते हैं और पवित्र गंगाजल लेकर अपने आराध्य महादेव का जलाभिषेक करते हैं। इस दौरान पूरा वातावरण "बोल बम" और "हर-हर महादेव" के जयघोष से भक्तिमय हो उठता है। कांवड़ यात्रा न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि संयम, तपस्या और भक्ति का भी पर्व है, जिसमें श्रद्धालु कठिन यात्रा पूरी कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। वर्ष 2026 में भी सावन के साथ इस पावन यात्रा की शुरुआत 30 जुलाई से होगी, जिसमें देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे।
सावन शिवरात्रि पर चढ़ेगा पवित्र गंगाजल
सावन माह की शुरुआत के साथ ही 30 जुलाई 2026 से कांवड़ यात्रा आरंभ हो जाएगी। इस दौरान लाखों शिव भक्त पवित्र गंगाजल लेकर अपने-अपने शिवालयों की ओर प्रस्थान करेंगे। सावन शिवरात्रि 11 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी, जिसे कांवड़ियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इसी अवसर पर श्रद्धालु भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करेंगे और सुख-समृद्धि तथा मंगलमय जीवन की कामना करेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन शिवरात्रि पर शिवलिंग पर जल अर्पित करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
कांवड़ यात्रा के प्रमुख प्रकार
कांवड़ यात्रा को श्रद्धालु अपनी क्षमता और संकल्प के अनुसार अलग-अलग तरीकों से पूरा करते हैं। सामान्य कांवड़ यात्रा में भक्त विश्राम करते हुए गंगाजल लेकर शिव मंदिर तक पहुंचते हैं। वहीं खड़ी कांवड़ यात्रा में कांवड़ को पूरे मार्ग में जमीन पर रखने की अनुमति नहीं होती, इसलिए इसे समूह में पूरा किया जाता है। दांडी कांवड़ यात्रा सबसे कठिन मानी जाती है, जिसमें श्रद्धालु दंडवत प्रणाम करते हुए आगे बढ़ते हैं। इसके अलावा डाक कांवड़ यात्रा भी काफी लोकप्रिय है, जिसमें भक्त बिना रुके तेज गति से गंतव्य तक पहुंचकर जलाभिषेक करते हैं।
कांवड़ यात्रा के दौरान इन नियमों का रखें ध्यान
कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि अनुशासन और तपस्या का भी प्रतीक है। यात्रा पर निकलने से पहले श्रद्धालु सात्विक जीवनशैली अपनाते हैं और मांसाहार सहित सभी तामसिक पदार्थों का त्याग करते हैं। इसके साथ तामसिक पदार्थों जैसे तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों से दूर रहने का संकल्प लिया जाता है। यात्रा के दौरान मन, वचन और कर्म की पवित्रता बनाए रखना आवश्यक माना गया है। शिव भक्त पूरी श्रद्धा, संयम और सकारात्मक सोच के साथ यह यात्रा पूर्ण करते हैं, जिससे भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
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