धर्म-अध्यात्म

आज रात जन्मेंगे कान्हा निशिता काल में करें पूजा जानें शुभ मुहूर्त और नियम

nidhi
4 Sept 2026 6:47 AM IST
आज रात जन्मेंगे कान्हा निशिता काल में करें पूजा जानें शुभ मुहूर्त और नियम
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लड्डू गोपाल की पूजा

नई दिल्ली: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पावन पर्व जन्माष्टमी 2026 इस बार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी पर निशिता काल यानी आधी रात की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।

इस दिन भक्त भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं और रात 12 बजे जन्मोत्सव मनाते हैं। 2026 में जन्माष्टमी का मुख्य पर्व 4 सितंबर को मनाया जा रहा है। निशिता काल पूजा 4 सितंबर की रात से 5 सितंबर की मध्यरात्रि तक रहेगी।
निशिता काल पूजा का शुभ समय
जन्माष्टमी 2026 में निशिता काल पूजा का समय रात करीब 11:57 बजे से 12:43 बजे तक बताया गया है। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक, श्रृंगार, आरती और जन्मोत्सव पूजा करना शुभ माना जाता है।
जन्माष्टमी पूजा विधि
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
पूजा स्थान को साफ कर भगवान कृष्ण की मूर्ति या लड्डू गोपाल को चौकी पर स्थापित करें।
भगवान को नए वस्त्र पहनाएं और फूलों, मोर पंख तथा झूले से सजाएं।
रात निशिता काल में पंचामृत से भगवान का अभिषेक करें।
भगवान को माखन मिश्री, पंजीरी, फल और मिठाई का भोग लगाएं।
श्रीकृष्ण मंत्रों का जाप करें और आरती के बाद प्रसाद ग्रहण करें।
पूजा सामग्री सूची
भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या लड्डू गोपाल
पंचामृत
गंगाजल
तुलसी के पत्ते
फूल और माला
पीले वस्त्र
मोर पंख
बांसुरी
माखन मिश्री
फल और मिठाई
दीपक और धूप
झूला
जन्माष्टमी व्रत का महत्व
मान्यता है कि जन्माष्टमी का व्रत रखने और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। भक्त इस दिन भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं को याद करते हुए भजन, कीर्तन और गीता पाठ करते हैं।
व्रत पारण का सही समय
जन्माष्टमी व्रत का पारण पूजा और तिथि समाप्ति के बाद किया जाता है। कई परंपराओं में मध्यरात्रि पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण किया जाता है, जबकि कुछ लोग अगले दिन सुबह पारण करते हैं। पंचांग के अनुसार स्थानीय समय के आधार पर पारण करना शुभ माना जाता है।
इन बातों का रखें ध्यान
पूजा में सात्विक भोजन और विचारों का पालन करें।
भगवान को तुलसी दल जरूर अर्पित करें।
व्रत रखने वाले अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार नियम अपनाएं।
पूजा के दौरान भगवान कृष्ण के नाम का स्मरण और भजन करें।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल धार्मिक पर्व नहीं बल्कि भक्ति, प्रेम और धर्म की विजय का प्रतीक भी मानी जाती है। इस दिन भक्त भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाकर उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं।
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