धर्म-अध्यात्म

तीन दिन बाद खुला Kamakhya temple

Ratna Netam
26 Jun 2026 3:50 PM IST
तीन दिन बाद खुला Kamakhya temple
x
भक्तों में दिखा उत्साह

Religion धर्म : अंबुबाची मेला समाप्त होने के बाद असम स्थित Kamakhya Temple के कपाट 26 जून 2026, शुक्रवार को दोबारा श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। तीन दिनों तक बंद रहने के बाद अब मंदिर में एक बार फिर भक्त मां कामाख्या के दर्शन कर सकेंगे। मंदिर प्रशासन ने दर्शन के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं ताकि आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

अंबुबाची मेला के दौरान हर वर्ष परंपरा के अनुसार मंदिर को कुछ दिनों के लिए बंद रखा जाता है। इस अवधि में मान्यता है कि देवी कामाख्या रजस्वला अवस्था में रहती हैं, इसलिए गर्भगृह में किसी भी भक्त का प्रवेश वर्जित होता है। यह परंपरा देवी की सृजन शक्ति और प्रकृति की उर्वरता का प्रतीक मानी जाती है, जो हिंदू आस्था में विशेष महत्व रखती है।

इस वर्ष भी 22 जून की रात ‘प्रवृत्ति’ अनुष्ठान के साथ मंदिर के कपाट बंद किए गए थे। इसके बाद लगातार तीन दिनों तक मंदिर में किसी भी प्रकार की पूजा-अर्चना या दर्शन की अनुमति नहीं थी। इस दौरान केवल परंपरागत धार्मिक क्रियाएं ही संपन्न की गईं। मेला समाप्त होने के बाद अब मंदिर को पुनः भक्तों के लिए खोल दिया गया है।

मंदिर खुलने के साथ ही श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में भक्त मां कामाख्या के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्थाओं को मजबूत किया है। कतारबद्ध दर्शन व्यवस्था और आवश्यक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है।

भक्तों की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में पवित्र अंगोदक और अंगवस्त्र का भी वितरण किया जाएगा। यह परंपरा अंबुबाची मेला के समापन के बाद श्रद्धालुओं को आशीर्वाद स्वरूप प्रदान की जाती है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है।

Kamakhya Temple का धार्मिक और तांत्रिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। यह भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक प्रमुख शक्तिपीठ है और नीलाचल पर्वत पर स्थित है। यहां देवी कामाख्या को योनिमुद्रा के रूप में पूजा जाता है, जो शक्ति और सृजन का प्रतीक है।

अंबुबाची मेला के दौरान मंदिर का बंद रहना और फिर पुनः खुलना श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इस अवसर पर लाखों भक्त मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं और इसे एक बड़े आध्यात्मिक पर्व के रूप में देखा जाता है।

कुल मिलाकर, अंबुबाची मेला के समापन के बाद Kamakhya Temple के कपाट खुलना श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर है, जिसमें आस्था, परंपरा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

Next Story