धर्म-अध्यात्म

काली पूजा 2026: जानें अमावस्या तिथि और शुभ मुहूर्त

nidhi
7 Nov 2026 1:47 PM IST
काली पूजा 2026: जानें अमावस्या तिथि और शुभ मुहूर्त
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भारत में पांच दिनों का पारंपरिक त्योहार मनाया जा रहा है, जिसकी शुरुआत धनतेरस से होती है, जो भगवान धन्वंतरि को समर्पित है। इसके बाद नरक चतुर्दशी आती है, जिसे काली चौदस और छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है; यह बड़ी दिवाली से एक दिन पहले मनाई जाती है। दिवाली को अलग-अलग मान्यताओं और नामों से मनाया जाता है; जैसे पंजाब में इसे 'बंदी छोड़ दिवस' के रूप में मनाया जाता है। देश के दक्षिणी हिस्सों में, दिवाली मुख्य रूप से भगवान कृष्ण और सत्यभामा की राक्षस नरकासुर पर जीत से जुड़ी है। गोवा में इस दिन नरकासुर के बड़े-बड़े पुतले जलाए जाते हैं, जबकि पूर्वी भारत में देवी काली की पूजा की जाती है, जिसे 'काली पूजा' कहा जाता है।
साल 2026 में, दिवाली के दिन यानी रविवार, 8 नवंबर को काली पूजा मनाई जाएगी। इस अवसर पर भक्त देवी दुर्गा के उग्र और शक्तिशाली रूप, देवी काली की पूजा करते हैं। वे उनसे सुरक्षा, शक्ति, समृद्धि और नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करने का आशीर्वाद मांगते हैं।
अमावस्या तिथि और निशीता मुहूर्त
परंपरा के अनुसार, काली पूजा हिंदू महीने कार्तिक की अमावस्या तिथि को की जाती है। वहीं, भारत में ज्यादातर लोग इस दिन देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं। पूजा-पाठ के लिए सबसे शुभ समय 'निशीता काल' माना जाता है, जो आधी रात के आसपास होता है। 'द्रिक पंचांग' के अनुसार, अमावस्या, निशीता और पूजा का मुहूर्त इस प्रकार है:
अमावस्या तिथि शुरू - 8 नवंबर 2026 को सुबह 11:27 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त - 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12:31 बजे
काली पूजा निशीता समय - 8 नवंबर की रात 11:56 बजे से 9 नवंबर की रात 12:47 बजे तक
काली पूजा कैसे मनाई जाती है?
दिन में होने वाले कई अन्य त्योहारों के विपरीत, काली पूजा पारंपरिक रूप से रात में की जाती है। भक्त मंदिरों और देवी काली के पंडालों में जाते हैं, जिन्हें बहुत खूबसूरती से सजाया जाता है, और देवी की प्रार्थना करते हैं। विशेष पूजा, मंत्रों का जाप और देवी को भोग अर्पित करना इस उत्सव का मुख्य हिस्सा है। काली पूजा का महत्व
काली पूजा देवी काली को समर्पित है। उन्हें देवी दुर्गा का एक शक्तिशाली रूप माना जाता है, जो शक्ति, सुरक्षा और बुराई के विनाश से जुड़ी हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, देवी काली बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक हैं और अपने भक्तों की नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करती हैं। दिवाली के दौरान काली पूजा की तिथि और समय शाक्त और तांत्रिक परंपराओं से जुड़े हैं, जिनका मुख्य केंद्र सृष्टि और विनाश के परम स्रोत, देवी काली की आराधना है।
देवी काली बुराई, अज्ञानता और नकारात्मक शक्तियों के विनाश का प्रतीक हैं। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, शक्तिशाली राक्षसों को हराने और अच्छाई व बुराई के बीच संतुलन बहाल करने के लिए उनका प्राकट्य हुआ था। उनका उग्र रूप अंधकार को नष्ट करने और भक्तों को नुकसान से बचाने की शक्ति का प्रतीक है।
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