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धर्म-अध्यात्म
Kajari Teej 2026 Date: कजरी तीज व्रत की तारीख, पूजा मुहूर्त और पूरी विधि यहां जानें
nidhi
24 July 2026 8:47 AM IST

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सुहागिनों और कुंवारी कन्याओं के लिए खास कजरी तीज, नोट करें व्रत की सही तारीख और पूजा विधि
हिंदू धर्म में तीज पर्वों का विशेष महत्व है। इन्हीं में से एक प्रमुख व्रत है कजरी तीज, जिसे सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए रखती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से इस व्रत को करती हैं।
कजरी तीज को कई जगहों पर कजली तीज के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित माना जाता है। इस दिन महिलाएं निर्जला या फलाहार व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा करती हैं।
कजरी तीज 2026 में कब मनाई जाएगी?
हिंदू पंचांग के अनुसार, कजरी तीज का व्रत भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है।
वर्ष 2026 में कजरी तीज का व्रत 10 अगस्त 2026, सोमवार को रखा जाएगा।
इस दिन महिलाएं सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लेती हैं और शाम के समय भगवान शिव, माता पार्वती और कजरी माता की पूजा करती हैं।
नोट: पूजा और चंद्रोदय के समय में शहर के अनुसार अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना शुभ माना जाता है।
कजरी तीज का धार्मिक महत्व
मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी कारण तीज व्रतों में शिव-पार्वती की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।
कजरी तीज व्रत रखने से जुड़ी प्रमुख मान्यताएं—
पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना।
वैवाहिक जीवन में प्रेम और सुख-शांति।
परिवार में समृद्धि और खुशहाली।
कुंवारी कन्याओं को योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति।
कजरी तीज 2026 पूजा विधि
1. सुबह की तैयारी
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
साफ कपड़े पहनें।
पूजा स्थान को साफ कर व्रत का संकल्प लें।
भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें।
2. पूजा सामग्री
कजरी तीज पूजा के लिए सामान्य रूप से इन सामग्रियों का उपयोग किया जाता है—
भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर।
फूल और माला।
दीपक और धूप।
रोली, अक्षत और सिंदूर।
फल और मिठाई।
सुहाग सामग्री जैसे चूड़ी, बिंदी, मेहंदी और वस्त्र।
3. शिव-पार्वती की पूजा
शाम के समय विधि-विधान से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
इसके बाद कजरी तीज व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें और आरती करें।
4. चंद्रमा को अर्घ्य
कई परंपराओं में महिलाएं रात में चंद्रमा के दर्शन कर उन्हें अर्घ्य देती हैं। इसके बाद व्रत का पारण किया जाता है।
कजरी तीज पर महिलाएं क्या करती हैं?
कजरी तीज के दिन महिलाएं—
मेहंदी लगाती हैं।
नए वस्त्र और आभूषण पहनती हैं।
लोकगीत गाती हैं।
झूला झूलने की परंपरा निभाती हैं।
माता पार्वती से अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।
कुंवारी कन्याओं के लिए कजरी तीज का महत्व
कई स्थानों पर कुंवारी लड़कियां भी कजरी तीज का व्रत रखती हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति से यह व्रत करने पर उन्हें मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होने का आशीर्वाद मिलता है।
हालांकि, व्रत और धार्मिक मान्यताएं व्यक्तिगत आस्था पर आधारित होती हैं।
कजरी तीज और अन्य तीज पर्वों में अंतर
तीज के अलग-अलग पर्व अलग-अलग समय पर मनाए जाते हैं—
हरियाली तीज: सावन माह में आती है।
कजरी तीज: भाद्रपद कृष्ण पक्ष में मनाई जाती है।
हरतालिका तीज: भाद्रपद शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है।
तीनों पर्वों में माता पार्वती और भगवान शिव की आराधना का महत्व है।
कजरी तीज पर रखें इन बातों का ध्यान
पूजा के दौरान मन को शांत रखें।
भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करें।
जरूरतमंदों को दान करें।
परिवार में प्रेम और सद्भाव बनाए रखें।
व्रत अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार करें।
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