धर्म-अध्यात्म

Malpua Prasad. को लेकर कैंची धाम में बढ़ी रौनक

Ratna Netam
10 Jun 2026 5:06 PM IST
Malpua Prasad. को लेकर कैंची धाम में बढ़ी रौनक
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आस्था का प्रतीक भी माना जाता है।

Uttarakhand उत्तराखंड : के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि लाखों भक्तों की श्रद्धा और आस्था का प्रतीक भी माना जाता है। नीम करौली महाराज के दर्शन के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु सालभर आते रहते हैं। हर साल 15 जून को कैंची धाम का स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया जाता है। इस अवसर पर भक्त बाबा नीम करौली के दर्शन के साथ साथ प्रसिद्ध मालपुए का प्रसाद प्राप्त करने के लिए भी विशेष रूप से आते हैं।

कैंची धाम में मालपुए का विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यह प्रसाद बाबा नीम करौली महाराज को बेहद प्रिय था। श्रद्धालु इसे प्राप्त करने के लिए बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ आते हैं। इस साल भी 10 जून 2026, बुधवार से कैंची धाम में मालपुए का प्रसाद बनना शुरू हो गया है।

प्रसाद बनाने की प्रक्रिया बेहद खास और पारंपरिक तरीके से की जाती है। इसके लिए मथुरा से एक दर्जन कारीगर आए हैं, जो स्थानीय सेवकों और ग्रामीणों के साथ मिलकर प्रसाद बनाते हैं। स्थानीय ग्रामीण और मंदिर के सेवक इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाते हैं और कारीगरों की सहायता करते हैं।

कैंची धाम में प्रसाद बनाने के कड़े नियम हैं। कहा जाता है कि प्रसाद को बनाने में वही श्रद्धालु भाग ले सकता है जिसने व्रत रखा हो और लगातार उतने समय तक हनुमान चालीसा का पाठ कर सके। इसके साथ ही, प्रसाद बनाने वाले को धोती-कुर्ता पहनना अनिवार्य होता है। इन नियमों का पालन करके ही भक्त प्रसाद बनाने की इस पुण्य प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं।

मथुरा से आए कारीगर और स्थानीय सेवक मिलकर प्रतिदिन बड़े पैमाने पर मालपुए तैयार करते हैं। यह प्रसाद भक्तों को बांटा जाता है और इसे लेने के लिए श्रद्धालु सुबह से ही मंदिर परिसर में लाइन लगाते हैं। कैंची धाम की व्यवस्थाएं इस बड़े आयोजन को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए पहले से ही पूरी कर ली जाती हैं।

विशेषज्ञों और धार्मिक जानकारों के अनुसार, कैंची धाम में मालपुए का प्रसाद भक्तों में विश्वास और भक्ति की भावना को और मजबूत करता है। यह न केवल बाबा नीम करौली की याद दिलाता है, बल्कि भक्तों के लिए आस्था और संयम का प्रतीक भी है।

कुल मिलाकर, कैंची धाम में इस साल भी मालपुए का प्रसाद बनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और श्रद्धालु इसके लिए उत्साहित हैं। मथुरा से आए कारीगरों, स्थानीय सेवकों और ग्रामीणों की मेहनत से यह प्रसाद तैयार होता है और भक्तों तक पहुंचता है। यह धार्मिक उत्सव कैंची धाम की आस्था और श्रद्धा की परंपरा को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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