धर्म-अध्यात्म

Jivitputrika Vrat 2021 Date: संतान प्राप्ति, उनकी लंबी आयु, सुरक्षा, सुखी जीवन के लिए रखा जाता है जीवित्पुत्रिका व्रत, जानें पूजा मुहूर्त, जितिया व्रत का पारण समय व महत्व

Tulsi Rao
16 Sept 2021 1:58 PM IST
Jivitputrika Vrat 2021 Date: संतान प्राप्ति, उनकी लंबी आयु, सुरक्षा, सुखी जीवन के लिए रखा जाता है जीवित्पुत्रिका व्रत, जानें पूजा मुहूर्त, जितिया व्रत का पारण समय व महत्व
x
संतान प्राप्ति, उनकी लंबी आयु, सुरक्षा और सुखी जीवन के लिए रखे जाने वाले व्रतों में से एक प्रमुख व्रत जितिया व्रत भी है. इसे जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहते हैं. हिन्दू कैलेंडर के अनुसार जीवित्पुत्रिका व्रत हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। Jivitputrika Vrat 2021 Date: संतान प्राप्ति, उनकी लंबी आयु, सुरक्षा और सुखी जीवन के लिए रखे जाने वाले व्रतों में से एक प्रमुख व्रत जितिया व्रत भी है. इसे जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहते हैं. हिन्दू कैलेंडर के अनुसार जीवित्पुत्रिका व्रत हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है.

गंधर्व राजकुमार जीमूतवाहन के नाम पर ही इस व्रत का नाम जीवित्पुत्रिका रखा गया है. साल 2021 में जीवित्पुत्रिका व्रत 19 सितंबर दिन बुधवार को रखा जाएगा. यह व्रत माताएं अपनी संतान के कल्याण की कामना एवं उनकी सुरक्षा तथा उनके सुखी जीवन के लिए निर्जला और निराहार रखती हैं.
जीवित्पुत्रिका व्रत 2021 मुहूर्त
हिंदी पंचांग के मुताबिक़, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 28 सितंबर दिन मंगलवार की शाम को 06 बजकर 16 मिनट से शुरू हो रही है. यह अष्टमी तिथि अगले दिन यानी 29 सिंतबर दिन बुधवार को रात 08 बजकर 29 मिनट पर समाप्त होगी. तदोपरांत नवमी तिथि प्रारंभ होगी. धार्मिक व लोक मान्यताओं के अनुसार व्रत के लिए उदयातिथि ही मान्य होती है. ऐसे में जीवित्पुत्रिका व्रत 29 सितंबर को रखा जाएगा.
जितिया व्रत का पारण समय
जीवित्पुत्रिका व्रत 29 सितंबर को रखा जायेगा तथा व्रत का पारण 30 सितंबर दिन गुरुवार को किया जाएगा. इस दिन मताप्न को चाहिए कि वे प्रात: काल स्नान आदि के बाद पूजा करके पारण करें. सूर्योदय के बाद का पारण अच्छा माना जाता है.
जीवित्पुत्रिका व्रत का महत्व
इस व्रत को करने से संतान को दीर्घ आयु, आरोग्य और सुखी जीवन प्राप्त होता है. जीवित्पुत्रिका व्रत में पानी और अन्न का त्याग किया जाता है, इसलिए यह निर्जला व्रत कहलाता है.


Next Story