- Home
- /
- अन्य खबरें
- /
- धर्म-अध्यात्म
- /
- जीवित्पुत्रिका व्रत आज...
धर्म-अध्यात्म
जीवित्पुत्रिका व्रत आज से शुरू, देखें पूजा मुहूर्त और पारण का शुभ समय
nidhi
2 Oct 2026 9:52 AM IST

x
आज से शुरू हुआ तीन दिवसीय जितिया व्रत
नई दिल्ली: संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाने वाला जितिया व्रत यानी जीवित्पुत्रिका व्रत शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 से नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया है। यह पर्व तीन दिनों तक चलता है। 3 अक्टूबर को मुख्य निर्जला व्रत रखा जाएगा और 4 अक्टूबर को पारण के साथ इसका समापन होगा।
जितिया व्रत विशेष रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में बड़े श्रद्धाभाव से मनाया जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और सुखी जीवन के लिए कठिन निर्जला उपवास रखती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियमों के साथ करने से संतान को दीर्घायु और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
इस साल जितिया व्रत की शुरुआत 2 अक्टूबर को नहाय-खाय से हुई है। नहाय-खाय के दिन व्रती महिलाएं स्नान के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं और अगले दिन के निर्जला व्रत का संकल्प लेती हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में नहाय-खाय के भोजन और परंपराओं में थोड़ा अंतर देखने को मिलता है।
मुख्य जितिया व्रत 3 अक्टूबर 2026, शनिवार को रखा जाएगा। अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर की सुबह लगभग 7:59 बजे शुरू होकर 4 अक्टूबर की सुबह करीब 5:51 बजे तक रहेगी। इसी कारण मुख्य व्रत 3 अक्टूबर को रखा जाएगा।
जितिया के दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले पारंपरिक ‘ओठगन’ की रस्म पूरी करती हैं और इसके बाद दिनभर बिना अन्न और जल ग्रहण किए व्रत रखती हैं। शाम के समय भगवान जीमूतवाहन की पूजा की जाती है और जितिया व्रत कथा सुनी जाती है।
पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:38 से 5:26 बजे तक, अभिजीत मुहूर्त 11:46 से 12:34 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6:05 से 6:29 बजे तक रहेगा। क्षेत्र और स्थानीय पंचांग के अनुसार इन समयों में थोड़ा बदलाव संभव है।
पूजा के दौरान भगवान जीमूतवाहन की कथा का विशेष महत्व माना जाता है। परंपरा के अनुसार मिट्टी या कुश से प्रतिमा बनाकर पूजा की जाती है। धूप, दीप, फूल, सिंदूर, अक्षत और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। इसके बाद व्रत कथा सुनी जाती है और संतान के अच्छे स्वास्थ्य तथा दीर्घायु की प्रार्थना की जाती है।
जितिया व्रत का पारण 4 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा। उपलब्ध पंचांग गणनाओं के अनुसार पारण सुबह सूर्योदय के बाद किया जाएगा और कई पंचांगों में सुबह 7:28 बजे के बाद पारण का समय बताया गया है।
पारण से पहले सूर्यदेव को अर्घ्य देने की परंपरा भी है। इसके बाद व्रती महिलाएं जल और भोजन ग्रहण करके व्रत पूरा करती हैं। कुछ क्षेत्रों में पारण के दौरान पारंपरिक भोजन बनाने की भी परंपरा है।
जितिया व्रत को कठिन व्रतों में गिना जाता है क्योंकि इसमें लंबे समय तक निर्जला उपवास रखा जाता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों या स्वास्थ्य संबंधी समस्या से जूझ रही महिलाओं को अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।
इस वर्ष जितिया व्रत की तीन दिवसीय प्रक्रिया 2 अक्टूबर को नहाय-खाय, 3 अक्टूबर को निर्जला व्रत और 4 अक्टूबर को पारण के साथ पूरी होगी। धार्मिक परंपराओं के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा और पारण की विधि में थोड़ा अंतर हो सकता है।
Next Story





