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धर्म-अध्यात्म
जितिया व्रत 2026: विशेष तिथि संयोग में पूजा-व्रत का क्या है महत्व
nidhi
1 Oct 2026 10:12 AM IST

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सप्तमी-युक्त अष्टमी में होगा व्रत
नई दिल्ली: जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाने वाला प्रमुख निर्जला व्रत है। वर्ष 2026 में जितिया व्रत 3 अक्टूबर, शनिवार को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर को सुबह करीब 7:59 बजे शुरू होकर 4 अक्टूबर की सुबह तक रहेगी। अलग-अलग शहरों में समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।
जितिया व्रत मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। नेपाल में भी इसे जितिया के नाम से बड़े स्तर पर किया जाता है। इस दिन माताएं संतान की रक्षा और दीर्घायु के लिए दिन-रात निर्जला उपवास रखती हैं।
इस बार सप्तमी के बाद अष्टमी तिथि के विशेष संयोग के कारण व्रत को और महत्वपूर्ण माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं में अष्टमी तिथि जीवित्पुत्रिका व्रत का मुख्य आधार है। इसी दिन पूजा और व्रत का विधान किया जाता है।
जितिया व्रत के साथ राजा जीमूतवाहन की कथा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि उन्होंने दूसरे के प्राण बचाने के लिए अपने जीवन का त्याग करने तक का संकल्प लिया था। इसलिए यह व्रत त्याग, मातृत्व और संतान के प्रति निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक माना जाता है।
व्रत के दिन महिलाएं प्रातः स्नान के बाद पूजा करती हैं और पूरे दिन अन्न-जल का त्याग करती हैं। जीवित्पुत्रिका व्रत की पूजा में भगवान वासुदेव की आराधना का भी उल्लेख मिलता है।
जितिया व्रत का पारण अष्टमी तिथि समाप्त होने के बाद परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार किया जाता है। इसलिए व्रती महिलाओं को अपने क्षेत्र के पंचांग के मुताबिक पारण का सही समय देखना चाहिए।
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