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धर्म-अध्यात्म
जितिया व्रत 2026: पूजा के दौरान इन नियमों का रखें खास ध्यान
Tara Tandi
24 Sept 2026 3:20 PM IST

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जितिया व्रत ज्योतिष न्यूज़: पूजा के दौरान इन नियमों का रखें खास ध्यानहिंदू धर्म में जितिया व्रत को संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ा महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। इसे जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में इस व्रत को विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में जितिया व्रत 3 अक्टूबर को रखा जाएगा। परंपरा के अनुसार माताएं अपनी संतान के अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु और सुरक्षित जीवन की कामना करते हुए यह कठिन व्रत करती हैं। यह व्रत निर्जला रखा जाता है और इसके साथ कई धार्मिक नियम जुड़े हुए हैं। ऐसे में व्रत के दौरान कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी माना जाता है।
जितिया व्रत में इन 5 बातों से बचें
1. व्रत के दौरान जल या भोजन न लें
जितिया व्रत की प्रमुख विशेषता निर्जला उपवास है। धार्मिक परंपरा के अनुसार व्रती महिलाएं व्रत पूरा होने तक पानी और भोजन ग्रहण नहीं करती हैं। बीच में कुछ खाने-पीने को व्रत के नियमों का उल्लंघन माना जाता है।
2. टूटा या खराब जितिया धागा न पहनाएं
जितिया व्रत के दौरान संतान की मंगलकामना के लिए जितिया धागा धारण कराने की परंपरा है। इसे स्वच्छ और सही अवस्था में ही इस्तेमाल करने की मान्यता है। इसलिए टूटे या गंदे धागे का प्रयोग करने से बचना चाहिए।
3. क्रोध और कटु वाणी से बचें
व्रत के दिन मन को शांत रखने और किसी से विवाद न करने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन माता को अपने विचारों, वाणी और व्यवहार में संयम रखना चाहिए। इसलिए अपशब्द, झगड़े और क्रोध से दूरी बनाए रखें।
4. घर में तामसिक भोजन न बनाएं
जितिया व्रत से जुड़ी परंपराओं में सात्विकता को महत्व दिया जाता है। इस दिन प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा जैसे पदार्थों से परहेज करने की मान्यता है। परिवार में भी सात्विक भोजन रखने की परंपरा है।
5. व्यर्थ के सांसारिक कामों में मन न उलझाएं
व्रत के दिन धार्मिक कार्यों, पूजा और ईश्वर के स्मरण के लिए समय निकालना शुभ माना जाता है। किसी के प्रति बुरा विचार रखने या जानबूझकर किसी का अहित करने से बचना चाहिए।
जितिया व्रत में क्या करना चाहिए?
व्रत से एक दिन पहले नहाय-खाय की परंपरा निभाई जाती है। इस दिन घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई करके सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है। परंपरा के अनुसार मरुआ की रोटी और नोनी का साग खाया जाता है।
जितिया व्रत के दिन श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना और माता जितिया का स्मरण करें। व्रत पूरा होने के बाद निर्धारित तिथि पर पारण किया जाता है। पारण में पारंपरिक रूप से मड़ुआ की रोटी और साग ग्रहण करने की परंपरा है। इसके बाद जरूरतमंदों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान देना भी शुभ माना जाता है।
ध्यान रखें कि निर्जला व्रत स्वास्थ्य के लिए कठिन हो सकता है। गर्भवती, बीमार, बुजुर्ग या किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही महिलाओं को व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
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