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धर्म-अध्यात्म
28 जनवरी का पंचांग: माघ माह की दशमी तिथि, नोट कर लें शुभ-अशुभ समय
jantaserishta.com
27 Jan 2026 8:52 AM IST

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नई दिल्ली: नया कार्य शुरू करना हो या कोई शुभ कार्य इसके लिए सनातन धर्म में पंचांग का विचार महत्वपूर्ण है। शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य सफल तो अशुभ समय में किए कार्य सफल नहीं हो पाते। 28 जनवरी को बुधवार और माघ माह की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि है, जो शाम 4 बजकर 35 मिनट तक रहेगी। इसके बाद एकादशी तिथि शुरू हो जाएगी।
इस दिन चंद्रमा वृषभ राशि में संचरण करेंगे। कृत्तिका नक्षत्र सुबह 9 बजकर 26 मिनट तक और उसके बाद रोहिणी नक्षत्र शुरू होगा। ब्रह्म योग रात 11 बजकर 54 मिनट तक प्रभावी रहेगा, जबकि करण गर शाम 4 बजकर 35 मिनट तक और उसके बाद वणिज होगा। बुधवार को सूर्योदय 7 बजकर 11 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 57 मिनट पर होगा।
बुधवार को विशेष योग की बात करें तो इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग पूरे दिन प्रभावी रहेंगे, जो शुभ कार्यों के लिए बहुत अच्छे माने जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 25 मिनट से 6 बजकर 18 मिनट तक, अमृत काल सुबह 7 बजकर 13 मिनट से 8 बजकर 42 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 22 मिनट से 3 बजकर 5 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 5 बजकर 54 मिनट से 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगा।
वहीं, अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 12 बजकर 34 मिनट से 1 बजकर 55 मिनट तक रहेगा, जिस दौरान कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश या नया काम शुरू करना वर्जित होता है। यमगण्ड सुबह 8 बजकर 32 मिनट से 9 बजकर 53 मिनट तक है।
बुधवार का दिन विघ्न विनाशन भगवान गणेश को समर्पित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन उनकी पूजा करने से बुद्धि तेज होती है, सभी विघ्न दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। पूजा के लिए सुबह ब्रह्म मुहूर्त या शुभ समय का चुनाव पंचांग के अनुसार करें। स्नान-ध्यान के बाद पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके गणपति की विधि-विधान से पूजा करें। उन्हें दूर्वा, लाल फूल, सिंदूर का तिलक, मोदक, गुड़-घी का भोग लगाएं। धूप, दीप और कपूर जलाएं। इसके बाद 'ओम गं गणपतये नमः' मंत्र का कम से कम 11 या 108 बार जप करें। गणेश चालीसा या अथर्वशीर्ष, गणेश संकट नाशन स्त्रोत का पाठ करें, फिर आरती उतारें और प्रसाद वितरित करें।
गौरी गणेश को दूर्वा, मोदक, लड्डू, गुड़, केला, लाल फूल और शमी के पत्ते बहुत प्रिय हैं। तुलसी या मुरझाए फूल कभी न चढ़ाएं। भोग लगाने के बाद यथाशक्ति ब्राह्मण, गरीबों या जरूरतमंदों को दान करना पुण्यदायी होता है।
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