धर्म-अध्यात्म

अखंड ज्योति के पास सोना शुभ या अशुभ? नवरात्रि से पहले जान लें ये 3 नियम

nidhi
8 Oct 2026 11:06 AM IST
अखंड ज्योति के पास सोना शुभ या अशुभ? नवरात्रि से पहले जान लें ये 3 नियम
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शारदीय नवरात्रि में अखंड ज्योति के नियम
नई दिल्ली: शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व इस वर्ष 11 अक्टूबर 2026, रविवार से शुरू होने जा रहा है। इस दौरान श्रद्धालु नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना करेंगे। कई घरों में घटस्थापना के साथ अखंड ज्योति जलाने की परंपरा भी निभाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अखंड ज्योति माता रानी के प्रति अटूट श्रद्धा, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है। इसे पूरे नवरात्रि पर्व के दौरान लगातार जलाए रखने का संकल्प लिया जाता है। हालांकि, अखंड ज्योति के पास सोते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है, ताकि पूजा में किसी प्रकार का व्यवधान न आए। अखंड ज्योति जलाने की परंपरा कई परिवारों में पीढ़ियों से चली आ रही है। इस दौरान परिवार का कोई सदस्य दीपक की देखभाल करने की जिम्मेदारी निभाता है। धार्मिक परंपराओं में अखंड ज्योति को बिना बुझाए जलाए रखने का विशेष महत्व बताया गया है। वहीं, जलते दीपक के आसपास अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखना भी बेहद आवश्यक है।
पहली गलती: जलते दीपक के बेहद पास सोना
अखंड ज्योति के पास सोते समय सबसे बड़ी सावधानी उचित दूरी बनाए रखना है। दीपक के आसपास बिस्तर, चादर, तकिया या कपड़े जैसी ज्वलनशील वस्तुएं नहीं रखनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति दीपक के बहुत करीब सोता है, तो नींद में करवट बदलते समय उसका हाथ या कपड़ा दीपक से टकरा सकता है। इससे दीपक गिरने या आग लगने का खतरा हो सकता है। इसलिए अखंड ज्योति को मजबूत और स्थिर स्थान पर रखना चाहिए। दीपक के आसपास पर्याप्त खाली जगह होनी चाहिए। सोते समय जलती लौ से सुरक्षित दूरी बनाए रखना आवश्यक है।
दूसरी गलती: ज्योति को बिना निगरानी के छोड़ देना
धार्मिक मान्यता के अनुसार, अखंड ज्योति लगातार जलती रहनी चाहिए। इसलिए श्रद्धालु समय-समय पर दीपक में तेल या घी की मात्रा की जांच करते हैं। लेकिन दीपक को जलता छोड़कर सो जाना या उसे बिना निगरानी के रखना आग लगने का जोखिम पैदा कर सकता है। विशेष रूप से छोटे बच्चों और पालतू जानवरों वाले घरों में अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। अखंड ज्योति के लिए ऐसी जगह चुनें, जहां हवा के तेज झोंके न आते हों और दीपक के गिरने की आशंका कम हो। जलती लौ की सुरक्षा को धार्मिक परंपरा से ऊपर प्राथमिकता देना जरूरी है।
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तीसरी गलती: पूजा स्थल के आसपास गंदगी और सामान रखना
नवरात्रि में पूजा स्थल को साफ-सुथरा रखने का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, अखंड ज्योति के आसपास अनावश्यक सामान और गंदगी नहीं होनी चाहिए। दीपक के पास कागज, प्लास्टिक, सूखे फूल, कपड़े या अन्य ज्वलनशील सामग्री रखने से बचना चाहिए। पूजा स्थल पर स्वच्छता बनाए रखने के साथ दीपक की सुरक्षित व्यवस्था भी सुनिश्चित करें। धार्मिक मान्यता में स्वच्छता को सात्विक वातावरण से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए श्रद्धालु नवरात्रि में पूजा स्थल की नियमित सफाई करते हैं।
अखंड ज्योति का धार्मिक महत्व
मान्यताओं के अनुसार, अखंड ज्योति जलाने से घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है और माता दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। इसे श्रद्धा और निरंतर साधना का प्रतीक माना जाता है। अखंड ज्योति के पास सोने से पूजा स्वतः खंडित हो जाती है, ऐसा कोई सार्वभौमिक धार्मिक नियम नहीं है। विभिन्न परिवारों और परंपराओं में पूजा की विधियां अलग-अलग हो सकती हैं। श्रद्धालुओं को अपनी पारिवारिक परंपराओं का पालन करते हुए दीपक की सुरक्षित व्यवस्था करनी चाहिए। इससे धार्मिक आस्था के साथ परिवार की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जा सकेगा।
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