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धर्म-अध्यात्म
Jainism में मेरु त्रयोदशी 16 जनवरी को विशेष श्रद्धा के साथ मनाई जाएगी
Harrison
14 Jan 2026 7:34 PM IST

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Religion Spirituality, धर्म अध्यात्म : जैन धर्म में 16 जनवरी 2026 को मेरु त्रयोदशी का पर्व धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। यह पावन तिथि प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव के निर्वाण से जुड़ी हुई है और इसे आत्मशुद्धि, तप और पुण्य का प्रतीक माना जाता है। जैन धर्मावलंबी इस दिन विशेष पूजा, साधना, जप, दान और उपवास करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, मेरु त्रयोदशी का महत्व जैन धर्म में अत्यधिक माना जाता है। इस दिन किए गए धार्मिक क्रियाकलापों को अत्यंत फलदायी माना जाता है। अनुयायी इस अवसर पर अपने जीवन में आंतरिक शक्ति और आध्यात्मिक प्रगति के लिए प्रयास करते हैं। साधना और जप के माध्यम से आत्मा की शुद्धि की जाती है और धर्म के मार्ग पर स्थिर रहने की प्रेरणा मिलती है।
दान और उपवास का महत्व इस दिन और भी बढ़ जाता है। जैन अनुयायी जरूरतमंदों को वस्त्र, भोजन और अन्य आवश्यक सामग्री दान में देते हैं। इससे न केवल समाज में सहयोग और मानवता की भावना बढ़ती है, बल्कि व्यक्ति के अपने जीवन में पुण्य और आध्यात्मिक लाभ भी प्राप्त होते हैं।
विशेष साधना और ध्यान के माध्यम से अनुयायी मानसिक शांति और संतुलन प्राप्त करते हैं। जैन धर्म में यह माना जाता है कि इस दिन किए गए धार्मिक कर्म जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हैं। यह तिथि व्यक्तिगत आत्मिक उन्नति के साथ-साथ समाज में सद्भाव और करुणा बढ़ाने का अवसर भी देती है।
मेरु त्रयोदशी के अवसर पर जैन मंदिरों में विशेष पूजा कार्यक्रम और धार्मिक प्रवचन आयोजित किए जाते हैं। श्रद्धालु मंदिरों में जाकर भगवान ऋषभदेव की प्रतिमा के समक्ष प्रार्थना करते हैं और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करते हैं। इस दिन की पूजा में आत्मानुशासन और संयम पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार, मेरु त्रयोदशी न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह पर्व लोगों को अपने कर्तव्यों और धर्म के मार्ग पर स्थिर रहने की शिक्षा देता है। उपवास और साधना से व्यक्ति अपने अंदर की इच्छाओं और वासनाओं पर नियंत्रण रखता है, जिससे जीवन में संतुलन और स्थिरता आती है।
जैन धर्मावलंबी इस दिन विशेष रूप से अपने घरों और मंदिरों को सजाते हैं। पूजा स्थल पर दीपक और फूलों से सजावट की जाती है। धार्मिक गीत और मंत्रों के माध्यम से वातावरण को पवित्र और आध्यात्मिक बनाया जाता है। इस अवसर पर परिवार और समाज के सदस्य मिलकर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं।
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