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ज्योतिष में राहु को छाया ग्रह माना जाता है, कुंडली में स्थिति से बदलता है प्रभाव

Religion Desk धर्म डेस्क : ज्योतिष शास्त्र में राहु को एक छाया ग्रह के रूप में वर्णित किया गया है। मान्यता के अनुसार, राहु स्वयं न तो पूर्ण रूप से शुभ माना जाता है और न ही अशुभ, बल्कि यह जिस ग्रह और राशि के साथ स्थित होता है, उसके गुणों के आधार पर अपना प्रभाव दिखाता है। इस कारण कुंडली में राहु की स्थिति को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु मजबूत स्थिति में होता है, तो वह व्यक्ति असाधारण सफलता प्राप्त कर सकता है। ऐसे मामलों में राहु व्यक्ति को उच्च पद, प्रतिष्ठा और प्रभावशाली स्थिति तक पहुंचाने में सहायक माना जाता है, यहां तक कि इसे “राजा बनाने वाला ग्रह” भी कहा जाता है।
इसके विपरीत, कमजोर या पीड़ित राहु की स्थिति जीवन में कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न कर सकती है। इसमें मानसिक तनाव, भ्रम, अचानक बाधाएं, निर्णय लेने में कठिनाई और सामाजिक जीवन में अस्थिरता जैसी स्थितियां शामिल हो सकती हैं।
ज्योतिष के अनुसार, राहु के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए कुछ सरल और पारंपरिक उपाय बताए गए हैं, जिन्हें लोग अपनी आस्था के अनुसार अपनाते हैं।
राहु दोष से बचाव के लिए प्रमुख उपायों में नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करना, शनिवार के दिन काले तिल और उड़द दाल का दान करना, और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना शामिल बताया गया है। इसके अलावा, राहु से संबंधित नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए दुर्गा माता की पूजा और मंत्र जाप को भी लाभकारी माना जाता है।
कुछ परंपराओं में यह भी कहा गया है कि नीले और काले रंग से जुड़े वस्त्रों का संतुलित उपयोग, और अनुशासित जीवनशैली अपनाने से राहु के प्रभाव में संतुलन आता है। साथ ही, किसी भी प्रकार के गलत कार्यों और अनैतिक आचरण से बचने की सलाह दी जाती है।
ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि राहु का प्रभाव व्यक्ति के कर्मों और मानसिक स्थिति पर भी निर्भर करता है, इसलिए सकारात्मक सोच और सही दिशा में प्रयास करना भी आवश्यक माना जाता है।
इस प्रकार, राहु को समझकर और उचित उपाय अपनाकर इसके प्रभाव को संतुलित करने की परंपरा लंबे समय से भारतीय ज्योतिष में प्रचलित है।





