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धर्म-अध्यात्म
श्राद्ध करने वालों के लिए जरूरी खबर पितृपक्ष की तिथियों में बदलाव
Ratna Netam
21 Sept 2026 2:21 PM IST

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धर्म : हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व माना जाता है। यह समय पूर्वजों को याद करने, उनके निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने के लिए समर्पित होता है। मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए कर्मों से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है। साल 2026 में पितृपक्ष की तिथियों को लेकर लोगों में खास चर्चा है, क्योंकि इस बार श्राद्ध पक्ष में एक तिथि के समायोजन के कारण सामान्य दिनों की तुलना में एक दिन कम दिखाई दे रहा है।
कब से शुरू होगा पितृपक्ष 2026
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष पितृपक्ष की शुरुआत भाद्रपद पूर्णिमा से मानी जा रही है। 26 सितंबर 2026 को पूर्णिमा श्राद्ध किया जाएगा, जबकि 27 सितंबर से प्रतिपदा श्राद्ध के साथ मुख्य पितृपक्ष प्रारंभ होगा। इसका समापन 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा।पितृपक्ष के दौरान लोग अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध कर्म करते हैं। अगर किसी व्यक्ति को अपने पूर्वज की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती है तो सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध करने की परंपरा मानी जाती है।
इस बार कौन सी तिथि एक ही दिन पड़ रही है?
धार्मिक पंचांग गणना के अनुसार इस बार तिथियों के घटने-बढ़ने के कारण कुछ श्राद्ध तिथियां एक ही दिन पड़ रही हैं। इसी वजह से पितृपक्ष के दिनों में एक दिन कम नजर आ रहा है। तिथि का निर्धारण सूर्योदय और तिथि के समय के आधार पर किया जाता है, इसलिए अलग-अलग स्थानों के पंचांग में कुछ अंतर भी देखने को मिल सकता है।ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, श्राद्ध कर्म हमेशा उस तिथि के अनुसार किया जाता है जिस दिन पूर्वज का देहांत हुआ था। तारीख आगे-पीछे होने से धार्मिक विधि में बदलाव नहीं होता, क्योंकि मुख्य आधार चंद्र तिथि होती है।
पितृपक्ष 2026 की प्रमुख श्राद्ध तिथियां
26 सितंबर 2026 – पूर्णिमा श्राद्ध
इस दिन पूर्णिमा तिथि पर दिवंगत हुए पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है।
27 सितंबर 2026 – प्रतिपदा श्राद्ध
प्रतिपदा तिथि पर जिनका निधन हुआ हो, उनका श्राद्ध इस दिन किया जाता है।
28 सितंबर 2026 – द्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर 2026 – तृतीया श्राद्ध
30 सितंबर 2026 – चतुर्थी श्राद्ध
1 अक्टूबर 2026 – पंचमी श्राद्ध
2 अक्टूबर 2026 – षष्ठी श्राद्ध
3 अक्टूबर 2026 – सप्तमी श्राद्ध
4 अक्टूबर 2026 – अष्टमी श्राद्ध
5 अक्टूबर 2026 – नवमी श्राद्ध
6 अक्टूबर 2026 – दशमी श्राद्ध
7 अक्टूबर 2026 – एकादशी श्राद्ध
8 अक्टूबर 2026 – द्वादशी श्राद्ध
9 अक्टूबर 2026 – त्रयोदशी और चतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्टूबर 2026 – सर्वपितृ अमावस्या
इस दिन उन सभी पितरों के लिए श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या किसी कारण से श्राद्ध नहीं हो पाया हो।
श्राद्ध में किन बातों का रखा जाता है ध्यान
पितृपक्ष में श्रद्धा, शुद्धता और नियमों का विशेष ध्यान रखा जाता है। इस दौरान लोग तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और जरूरतमंदों को दान करने जैसी परंपराओं का पालन करते हैं।मान्यता है कि पितरों के नाम से किए गए दान-पुण्य और सेवा कार्यों से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। कई लोग इस दौरान गया, प्रयागराज, हरिद्वार जैसे धार्मिक स्थानों पर जाकर पिंडदान और तर्पण भी करते हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है सर्वपितृ अमावस्या
पितृपक्ष का अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या कहलाता है। इसे महालया अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन सभी ज्ञात और अज्ञात पितरों के लिए श्राद्ध किया जाता है। जिन लोगों को अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि याद नहीं रहती, वे इस दिन श्राद्ध करके पितरों का स्मरण करते हैं।
तिथि को लेकर क्यों रहता है भ्रम
हिंदू पंचांग में तिथियां सूर्य और चंद्रमा की गति पर आधारित होती हैं। कई बार कोई तिथि सूर्योदय से पहले शुरू होकर अगले दिन तक रहती है या एक दिन में समाप्त हो जाती है। इसी कारण कुछ वर्षों में श्राद्ध पक्ष के दिनों की संख्या में अंतर दिखाई देता है।पितृपक्ष 2026 में भी इसी वजह से कुछ तिथियों के एक साथ आने की स्थिति बन रही है। हालांकि, धार्मिक मान्यता के अनुसार श्राद्ध कर्म के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात सही तिथि और श्रद्धा भाव है।इस बार पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक रहेगा। श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार अपने पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण कर सकते हैं।
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