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धर्म-अध्यात्म
Sawan में महामृत्युंजय मंत्र का महत्व, जानिए 108 बार जाप करने के दिव्य फायदे
Tara Tandi
19 July 2025 11:00 AM IST

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ज्योतिष न्यूज़: सावन का महीना हिन्दू धर्म में विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। यह समय होता है भगवान शिव की आराधना का, जब श्रद्धालु व्रत, उपवास, पूजा-अर्चना और मंत्रजाप के माध्यम से उनकी कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। इस पावन मास में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना विशेष फलदायक माना जाता है। यह मंत्र न केवल जीवन की कठिनाइयों से उबारने वाला है, बल्कि इसे मृत्यु के भय को दूर करने वाला मंत्र भी कहा जाता है।
क्या है महामृत्युंजय मंत्र?
महामृत्युंजय मंत्र एक अत्यंत शक्तिशाली वैदिक मंत्र है जो ऋषि मुनियों द्वारा भगवान रुद्र को समर्पित किया गया था। इसे 'त्रयम्बकम् मंत्र' भी कहा जाता है। यह मंत्र इस प्रकार है:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
इस मंत्र का अर्थ है: “हम त्रिनेत्रधारी शिव की उपासना करते हैं, जो संपूर्ण जीवन शक्ति और पोषण प्रदान करते हैं। जैसे खीरा पककर बेल से अलग हो जाता है, वैसे ही हम मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाएं और अमरत्व प्राप्त करें।”
सावन में क्यों है इसका विशेष महत्व?
सावन मास भगवान शिव को समर्पित है और ऐसा माना जाता है कि इस महीने में शिवशंकर जल्दी प्रसन्न होते हैं। विशेष रूप से सोमवार और प्रदोष व्रत में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से व्यक्ति की हर बाधा दूर होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह मंत्र रोग, शोक, भय और मृत्यु के संकट से रक्षा करता है। यही कारण है कि सावन के पावन दिनों में इसका 108 बार जाप करने की परंपरा अत्यंत फलदायक मानी गई है।
108 बार जाप का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व
हिंदू धर्म में 108 का अंक अत्यंत पवित्र माना गया है। हमारे शरीर में कुल 108 प्रमुख नाड़ियाँ मानी गई हैं, जिनमें से एक "सुषुम्ना" नाड़ी है जो सीधे ब्रह्मा रंध्र से जुड़ी होती है। जब कोई व्यक्ति 108 बार महामृत्युंजय मंत्र का जाप करता है, तो उसकी ऊर्जा सभी नाड़ियों को सक्रिय करती है और आत्मिक जागरण की ओर ले जाती है। इससे मानसिक शांति, आत्मबल और रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है।
महामृत्युंजय मंत्र जाप के अद्भुत लाभ
स्वास्थ्य लाभ: यह मंत्र शरीर के हर स्तर पर ऊर्जा पहुंचाता है। गंभीर बीमारियों में यह मंत्र चमत्कारी प्रभाव दिखा सकता है। कई रोगियों पर इसके जाप से चमत्कारिक सुधार देखे गए हैं।
मृत्यु भय से मुक्ति: जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह मंत्र मृत्युंजय अर्थात मृत्यु पर विजय दिलाने वाला है। गंभीर संकटों और दुर्घटनाओं में यह जीवनदायिनी शक्ति देता है।
मानसिक शांति और तनाव मुक्ति: नियमित जाप से मन की एकाग्रता बढ़ती है और तनाव से मुक्ति मिलती है। यह चिंता, अवसाद और मानसिक अशांति को दूर करता है।
नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा: यह मंत्र नकारात्मक शक्तियों को दूर भगाने वाला माना गया है। तांत्रिक बाधाएं, नजर दोष, भूत-प्रेत आदि से यह रक्षा करता है।
परिवारिक सुख और समृद्धि: इसका जाप परिवार में सुख-शांति बनाए रखता है और क्लेश, अशांति जैसी स्थितियों को शांत करता है।
जाप की विधि और सावधानियाँ
सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनकर शिवलिंग के सामने या किसी शांत स्थान पर बैठें।
रुद्राक्ष की माला से मंत्र का 108 बार जाप करें।
जाप करते समय मन एकाग्र रखें और भगवान शिव का ध्यान करें।
जाप के दौरान दीपक और धूप अवश्य जलाएं।
जल, बेलपत्र, दूध और गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक करें।
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