धर्म-अध्यात्म

कृष्ण भक्ति में डूबें आरती कुंज बिहारी की के साथ करें कान्हा का गुणगान

Ratna Netam
4 Sept 2026 9:44 PM IST
कृष्ण भक्ति में डूबें आरती कुंज बिहारी की के साथ करें कान्हा का गुणगान
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धर्म : भगवान श्रीकृष्ण की आराधना में आरती का विशेष महत्व माना जाता है। जन्माष्टमी, नंदोत्सव, पूजा-पाठ और रोजाना की भक्ति में भक्त भगवान कृष्ण की आरती गाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। भगवान कृष्ण को प्रेम, करुणा, धर्म और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। उनकी आरती करने से मन को शांति मिलती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
**“आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की…”** भगवान श्रीकृष्ण की सबसे लोकप्रिय आरतियों में से एक है। इसमें उनके मनमोहक स्वरूप, बांसुरी की मधुर धुन, गोपियों के साथ प्रेम और भक्तों पर उनकी कृपा का वर्णन किया गया है।
कृष्ण जी की आरती का महत्व
हिंदू धर्म में पूजा के अंत में आरती करने की परंपरा है। आरती के माध्यम से भक्त अपने आराध्य देव के प्रति श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करते हैं।
भगवान श्रीकृष्ण की आरती करने से भक्तों का मन शांत होता है और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। मान्यता है कि सच्चे मन से भगवान कृष्ण का स्मरण करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है।
आरती कुंज बिहारी की
**आरती कुंज बिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।**
**गले में बैजंती माला,
बजावै मुरली मधुर बाला।
श्रवण में कुण्डल झलकाला,
नंद के आनंद नंदलाला।**
**गगन सम अंग कांति काली,
राधिका चमक रही आली।
लतन में ठाढ़े बन
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