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शुक्र प्रदोष व्रत के दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा विधि-विधान कैसे करें, जानें शुभ मुहूर्त

Admin4
27 May 2022 9:21 AM GMT
शुक्र प्रदोष व्रत के दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा विधि-विधान कैसे करें, जानें शुभ मुहूर्त
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जनता से रिश्ता वेबडेस्क। Pradosh Vrat in May 2022 Puja Vidhi, Shubh Muhurt: हिंदू पंचांग के मुताबिक हर महीने की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। शुक्र प्रदोष व्रत के दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा विधि-विधान से की जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा अर्चना करने से भक्तों के सुख सौभाग्य में वृद्धि होती है एवं सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

मई महीना खत्म होने को है लेकिन हिन्दी कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि आज यानि 27 मई दिन शुक्रवार को है। यह जेष्ठ मास का पहला प्रदोष व्रत है। शुक्रवार पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा। इस प्रदोष व्रत के दिन शोभन योग, सर्वार्थ सिद्धि योग व सौभाग्य योग का निर्माण होने से इस दिन का महत्व और बढ़ रहा है। आइए जानते हैं, पूजा विधि, सामग्री और शुभ मुहूर्त
ज्येष्ठ माह का पहला प्रदोष व्रत-शुभ मुहूर्त

ज्येष्ठ, कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ: सुबह 11:47 दिन शुक्रवार 27 मई को प्रारंभ
ज्येष्ठ, कृष्ण त्रयोदशी समाप्त: दोपहर 28 मई को 01:09 समाप्त
प्रदोष काल: 27 मई 2022 को शाम 07:12 से लेकर रात 09:14 तक
शुक्र प्रदोष व्रत: 27 मई 2022, शुक्रवार
वर्तमान समय में कुंभ, मकर, मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती और कर्क, वृश्चिक राशि पर शनि की ढैय्या चल रही है। यदि इस राशि के जातक प्रदोष व्रत के दिन अशुभ प्रभावों से मुक्ति के लिए विधि- विधान से भगवान शंकर की पूजा-अर्चना करते हैं तो शिव जी की कृपा से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं और शनि के अशुभ प्रभावों से भी छुटकारा मिल जाता है। आइए जानते हैं भगवान शंकर को प्रसन्न करने की पूजा-विधि-
भगवान शिव की इस तरह से करें आराधना (प्रदोष व्रत पूजा- विधि)
प्रदोष व्रत के दिन प्रातः काल स्नान करें। उसके बाद स्वच्छ कपड़ा पहनकर घर के मंदिर में दीपज्योति प्रज्वलित करें। इसके बाद भोलेनाथ का गंगा जल से अभिषेक कर उन्हें उनका प्रिय पुष्प अर्पित कर उनकी पूजा करें। पूजा के पश्चात भोग लगाएं और उसके बाद आरती करें। पूजा सम्पन्न होने के बाद घर के सदस्यों को अंत में प्रसाद वितरण करें।
भगवान शिव की पूजा करने के लिए ये सामग्री जरूर पहले से लेकर रख लें। जिसमें- कुशासन, दही, शुद्ध देशी घी, शहद, गंगा जल, पवित्र जल, पंच रस, इत्र, गंध रोली, मौली जनेऊ, पंच मिष्ठान्न, पुष्प, पंच फल पंच मेवा, रत्न, सोना, चांदी, दक्षिणा, ईख का रस, कपूर, धूप, दीप, रूई, मलयागिरी, पूजा के बर्तन,बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बालें,तुलसी दल, मंदार पुष्प, गाय का कच्चा दूध, चंदन, शिव व मां पार्वती की श्रृंगार की सामग्री आदि।


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