धर्म-अध्यात्म

महाअष्टमी पर ऐसे करें मां महागौरी की पूजा, जानें मंत्र और भोग

nidhi
18 Oct 2026 9:25 AM IST
महाअष्टमी पर ऐसे करें मां महागौरी की पूजा, जानें मंत्र और भोग
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मां महागौरी की आराधना का विशेष दिन

धर्म डेस्क : शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा का विशेष महत्व है। देवी का यह स्वरूप शांति, पवित्रता और करुणा का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु महाअष्टमी पर व्रत, देवी पूजन और कन्या पूजन करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि मां महागौरी की आराधना से जीवन में सुख और मंगल की कामना की जाती है।

कब है महाअष्टमी और पूजा का समय?
वर्ष 2026 में आश्विन शुक्ल अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार महाअष्टमी का मुख्य पूजन सोमवार, 19 अक्टूबर को किया जाएगा।
प्रकाशित पंचांग विवरण में 19 अक्टूबर को कन्या पूजन के लिए सुबह 8 बजकर 29 मिनट से 10 बजकर 16 मिनट तक का समय बताया गया है। स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के अनुसार मुहूर्त में अंतर हो सकता है, इसलिए अपने नगर का समय मिलाकर पूजा करें। अष्टमी का पूजन करना हो तो तिथि समाप्त होने के समय का ध्यान रखें।
मां महागौरी का स्वरूप
प्रचलित धार्मिक वर्णन के अनुसार मां महागौरी का वर्ण गौर और वस्त्र श्वेत हैं। उन्हें वृषभ पर विराजमान दिखाया जाता है। उनकी चार भुजाओं में त्रिशूल, डमरू तथा अभय और वरद मुद्राएं होती हैं। देवी की शांत छवि श्रद्धालुओं को संयम और सद्भाव का संदेश देती है।
पूजा के लिए तैयार करें सामग्री
पूजा में देवी की प्रतिमा या चित्र, स्वच्छ आसन, जल, रोली, अक्षत, फूल, धूप, दीप, फल और भोग रखें। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार चुनरी तथा श्रृंगार सामग्री भी अर्पित कर सकते हैं। पूजा सामग्री उपलब्धता और सामर्थ्य के अनुसार रखें।
सुबह स्नान के बाद पूजा स्थान साफ करें। देवी के सामने बैठकर पूजा का संकल्प लें। पहले भगवान गणेश का स्मरण करें और फिर मां दुर्गा तथा महागौरी का ध्यान करें। जल, रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित करने के बाद धूप-दीप दिखाएं। मंत्र जप और आरती के बाद भोग लगाकर प्रसाद बांटें।
मां महागौरी का मंत्र
सरल नाम मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप कर सकते हैं—
ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
प्रचलित ध्यान श्लोक है—
श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥
इसका भाव है कि श्वेत वृषभ पर विराजमान, श्वेत वस्त्र धारण करने वाली पवित्र स्वरूपा मां महागौरी भक्तों का मंगल करें। मंत्र जप करते समय अर्थ और देवी के स्वरूप पर मन केंद्रित कर सकते हैं।
भोग में क्या अर्पित करें?
परंपरा के अनुसार मां महागौरी को नारियल, नारियल से बनी मिठाई, खीर और अन्य सात्त्विक पकवान अर्पित किए जाते हैं। कुछ परिवारों में हलवा, पूड़ी और चने का भोग लगाया जाता है। भोग स्वच्छता से तैयार करें और अपनी कुल परंपरा का पालन करें।
कन्या पूजन करने वाले श्रद्धालु कन्याओं को सम्मानपूर्वक आमंत्रित करें। उनकी सहजता और सहमति का ध्यान रखते हुए तिलक लगाएं, भोजन कराएं और सामर्थ्य के अनुसार उपहार दें। भोजन से पहले किसी खाद्य पदार्थ से एलर्जी या परहेज की जानकारी लेना भी उपयोगी है।
मां महागौरी की पौराणिक कथा
प्रचलित कथा के अनुसार देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की। लंबे समय तक तप करने से उनका शरीर धूल-मिट्टी से आच्छादित हो गया और वर्ण श्याम पड़ गया।
तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया। कथा में वर्णन मिलता है कि गंगाजल से स्नान कराने पर देवी का स्वरूप अत्यंत उज्ज्वल और गौर हो गया। इसी कारण उन्हें महागौरी कहा गया। इस कथा को तप, निष्ठा और आंतरिक पवित्रता के प्रतीक के रूप में समझा जाता है।
महाअष्टमी की पूजा में श्रद्धा के साथ दूसरों के प्रति सम्मान और करुणा का भाव बनाए रखना भी धार्मिक आचरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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