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धर्म-अध्यात्म
करवा चौथ पर ऐसे करें पूजा सरगी से अर्घ्य तक जानें हर रस्म
Ratna Netam
28 Sept 2026 4:37 PM IST

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धर्म : करवा चौथ हिंदू धर्म का एक प्रमुख व्रत और त्योहार है, जिसे सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए रखती हैं। इस दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलती हैं।साल 2026 में करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करती हैं और शाम को विधि-विधान से करवा माता, भगवान गणेश और चंद्र देव की पूजा करती हैं।
करवा चौथ 2026 की तारीख और महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार, करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रत करती हैं।
करवा चौथ 2026: 29 अक्टूबर, गुरुवार
इस दिन महिलाएं बिना भोजन और पानी के व्रत रखती हैं। शाम को पूजा के बाद चंद्रमा के दर्शन कर उन्हें अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद पति के हाथों से जल ग्रहण कर व्रत पूरा किया जाता है।
सरगी का महत्व
करवा चौथ के दिन व्रत की शुरुआत सरगी से होती है। सरगी सास की ओर से बहू को दिया जाने वाला शुभ उपहार माना जाता है।सरगी में फल, मिठाई, सूखे मेवे, कपड़े, श्रृंगार सामग्री और अन्य शुभ वस्तुएं शामिल होती हैं। महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी खाकर अपने व्रत की शुरुआत करती हैं।मान्यता है कि सरगी करने से पूरे दिन व्रत रखने के लिए ऊर्जा मिलती है।
करवा चौथ पूजा की तैयारी
करवा चौथ के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और व्रत का संकल्प लेती हैं। इसके बाद घर की साफ-सफाई कर पूजा की तैयारी की जाती है।शाम के समय महिलाएं पूजा स्थल को सजाती हैं। पूजा में करवा, दीपक, रोली, अक्षत, मिठाई, फल और अन्य सामग्री रखी जाती है।कई स्थानों पर महिलाएं एक साथ बैठकर करवा चौथ की कथा भी सुनती हैं।
करवा चौथ पूजा विधि
करवा चौथ की पूजा में सबसे पहले भगवान गणेश और माता पार्वती का ध्यान किया जाता है। इसके बाद करवा माता की पूजा की जाती है।पूजा के दौरान महिलाएं करवा में जल भरती हैं और उसे पूजा में शामिल करती हैं। इसके बाद करवा चौथ की कथा सुनी जाती है।पूजा के समय महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करती हैं।
चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि
करवा चौथ व्रत का सबसे महत्वपूर्ण समय चंद्रोदय का होता है। रात में चंद्रमा निकलने के बाद महिलाएं छलनी से चंद्रमा के दर्शन करती हैं।इसके बाद चंद्र देव को जल अर्पित किया जाता है। महिलाएं चंद्रमा की पूजा कर पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं।फिर छलनी से पति का चेहरा देखकर पति के हाथों से पानी पीकर व्रत समाप्त किया जाता है।
श्रृंगार का विशेष महत्व
करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाएं विशेष श्रृंगार करती हैं। इस दिन लाल, गुलाबी और अन्य शुभ रंगों के कपड़े पहनने की परंपरा है।महिलाएं मेहंदी लगाती हैं, चूड़ियां पहनती हैं और सोलह श्रृंगार करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह श्रृंगार वैवाहिक जीवन में प्रेम और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।
करवा चौथ व्रत की कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, करवा चौथ से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं। इनमें वीरवती की कथा सबसे प्रसिद्ध मानी जाती है।कथा के अनुसार, वीरवती ने अपने पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत रखा था। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनकी श्रद्धा और भक्ति के कारण उनके पति को जीवनदान मिला।इसी कारण महिलाएं करवा चौथ की कथा सुनकर अपने वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना करती हैं।
आधुनिक समय में करवा चौथ
समय के साथ करवा चौथ मनाने के तरीकों में बदलाव आया है, लेकिन इसकी धार्मिक और भावनात्मक महत्ता आज भी बनी हुई है।अब कई जगहों पर पति भी अपनी पत्नी के साथ व्रत रखते हैं और इस पर्व को आपसी प्रेम और सम्मान के प्रतीक के रूप में मनाते हैं।
करवा चौथ 2026 पूजा का महत्व
करवा चौथ केवल एक धार्मिक व्रत ही नहीं, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक भी माना जाता है।29 अक्टूबर 2026 को महिलाएं श्रद्धा और परंपरा के साथ यह व्रत रखेंगी। सरगी से शुरू होकर चंद्रमा को अर्घ्य देने तक की पूरी प्रक्रिया में धार्मिक मान्यताओं और पारिवारिक भावनाओं का विशेष महत्व होता है।
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