धर्म-अध्यात्म

स्वर्ग से धरती पर कैसे आया पारिजात वृक्ष जानिए पौराणिक कहानी

nidhi
17 Aug 2026 1:34 PM IST
स्वर्ग से धरती पर कैसे आया पारिजात वृक्ष जानिए पौराणिक कहानी
x
देवताओं के वृक्ष पारिजात की कथा स्वर्ग से धरती तक पहुंचने की कहानी

नई दिल्ली: भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म में कई पेड़-पौधों को दिव्य और पूजनीय माना गया है। इन्हीं में से एक है पारिजात वृक्ष। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पारिजात कोई साधारण पेड़ नहीं, बल्कि स्वर्ग से जुड़ा एक दिव्य वृक्ष है। इसकी कथा भगवान विष्णु, इंद्र और भगवान कृष्ण से जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि यह वृक्ष समुद्र मंथन के दौरान प्रकट हुआ था और बाद में स्वर्ग से धरती पर आया।

समुद्र मंथन से हुई पारिजात की उत्पत्ति
पौराणिक कथाओं के अनुसार जब देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन किया था, तब उसमें से कई दिव्य वस्तुएं और रत्न निकले थे। इन्हीं में से एक था पारिजात वृक्ष।
मान्यता है कि समुद्र मंथन से निकलने के बाद पारिजात वृक्ष को देवराज इंद्र अपने साथ स्वर्ग लोक ले गए। वहां यह वृक्ष नंदन वन की शोभा बढ़ाने लगा। इसकी सुगंध और दिव्य सुंदरता से पूरा स्वर्गलोक आकर्षित होता था।
स्वर्ग से धरती पर कैसे आया पारिजात?
पौराणिक कथाओं में भगवान श्रीकृष्ण और पारिजात वृक्ष का विशेष संबंध बताया गया है। एक कथा के अनुसार, जब भगवान कृष्ण की पत्नी सत्यभामा को पारिजात वृक्ष के बारे में पता चला तो उन्होंने इसे धरती पर लाने की इच्छा जताई।
भगवान कृष्ण सत्यभामा की इच्छा पूरी करने के लिए स्वर्ग लोक गए और वहां से पारिजात वृक्ष लेकर धरती पर आए। इस दौरान देवराज इंद्र और श्रीकृष्ण के बीच इस वृक्ष को लेकर प्रसंग भी मिलता है।
कहा जाता है कि भगवान कृष्ण ने पारिजात वृक्ष को द्वारका में स्थापित किया। इसके बाद यह वृक्ष धरती पर पूजनीय बन गया।
पारिजात को क्यों माना जाता है पवित्र?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पारिजात वृक्ष में देवी-देवताओं का वास माना जाता है। इसके फूल भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा में विशेष रूप से अर्पित किए जाते हैं।
मान्यता है कि पारिजात के फूलों से पूजा करने से भगवान प्रसन्न होते हैं और घर में सुख-शांति आती है। इसके फूल रात में खिलते हैं और सुबह जमीन पर गिर जाते हैं, इसलिए इन्हें तोड़ने की बजाय गिरे हुए फूलों को पूजा में इस्तेमाल करने की परंपरा कई स्थानों पर है।
पारिजात वृक्ष और लक्ष्मी का संबंध
कुछ धार्मिक मान्यताओं में पारिजात वृक्ष को माता लक्ष्मी से भी जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि जहां पारिजात का वृक्ष होता है, वहां सकारात्मक ऊर्जा और शुभता का वास होता है।
लोग मानते हैं कि घर के आसपास पारिजात का पौधा लगाने से वातावरण शुद्ध होता है और समृद्धि आती है।
बाराबंकी का प्रसिद्ध पारिजात वृक्ष
भारत में उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में स्थित पारिजात वृक्ष काफी प्रसिद्ध है। इसे दुनिया के सबसे पुराने पारिजात वृक्षों में से एक माना जाता है। स्थानीय लोग इसे धार्मिक आस्था का केंद्र मानते हैं और दूर-दूर से श्रद्धालु इसके दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
आध्यात्मिक संदेश
पारिजात वृक्ष की कथा केवल एक धार्मिक कहानी नहीं, बल्कि यह भी संदेश देती है कि प्रकृति और जीवन में मौजूद हर तत्व का अपना महत्व है। भारतीय परंपरा में पेड़ों को केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन और आस्था का प्रतीक माना गया है।
इसलिए पारिजात वृक्ष आज भी लोगों के लिए श्रद्धा, पवित्रता और दिव्यता का प्रतीक बना हुआ है।
Next Story