धर्म-अध्यात्म

मंगल आपके लिए कितना मंगलकारी रहेंगे, जानें क्या कहती है जन्मकुंडली

Tara Tandi
19 Oct 2020 8:04 PM IST
मंगल आपके लिए कितना मंगलकारी रहेंगे, जानें क्या कहती है जन्मकुंडली
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ग्रहों के सेनापति मंगल का ज्योतिष शास्त्र में विशेष महत्व बताया गया है। मंगल को ऊर्जा, साहस, शक्ति, पराक्रम और शौर्य का कारक माना जाता है।

जनता से रिश्ता वेबडेस्क| ग्रहों के सेनापति मंगल का ज्योतिष शास्त्र में विशेष महत्व बताया गया है। मंगल को ऊर्जा, साहस, शक्ति, पराक्रम और शौर्य का कारक माना जाता है। मंगल दोष के कारण कई लोगों के विवाह में कठिनाई आती है और मंगल को अनुकूल करने के बाद वैवाहिक समस्याओं का अंत होता है। मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल आपकी कुंडली में किस भाव में विराजमान है, इससे आपके पूरे जीवन की दिशा तय होती है। अगर व्यक्ति की कुंडली में मंगल अच्छा है तो वह काफी निडर और साहसी होता है और कुंडली में मंगल अशुभ स्थिति में बैठा है तो कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आइए जानते हैं कुंडली के सभी 12 भावों में मंगल कैसा प्रभाव देता है और उसका आपके जीवन पर क्या असर पड़ता है…

प्रथम भाव में मंगल हो तो

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली में मंगल अगर प्रथम भाव में है तो यह आपको काफी साहसी बनाता है। ऐसा व्यक्ति किसी के दवाब में रहना पसंद नहीं करता। साथ ही वह शारीरिक तौर पर काफी मजबूत होता है। हालांकि मंगल की ऐसी स्थिति में दुर्घटना की आशंका रहती है। शत्रुओं से परेशानी बनी रहती है और जीवनसाथी के साथ ज्यादा अच्छे संबंध नहीं रहते।

द्वितीय भाव में मंगल हो तो

कुंडली में मंगल अगर द्वितीय भाव में है तो कड़ी मेड़नत के बाद सफलता मिलती है। छात्रों शिक्षा के क्षेत्र में समस्याएं आती हैं। ऐसे व्यक्ति का स्वभाव काफी चिडचिडापन देखने को मिलता है। हर तरह के लोगों के साथ यह एडजस्ट कर लेते हैं। हालांकि मंगल की ऐसे स्थिति जीवनसाथी की आयु को प्रभावित करती है और पेट की समस्या बनी रहती है। आपके बच्चे काफी ऊर्जावान और बड़े पदों को प्राप्त करने वाले होते हैं।

तृतीय भाव में मंगल हो तो

कुंडली में मंगल अगर तृतीय भाव में है तो काफी धैर्यवान और प्रसिद्ध व्यक्ति होते हैं। ऐसा व्यक्ति बुद्धिमान के साथ-साथ कटुभाषी भी होता है। छोटे भाई के साथ ज्यादा अच्छे रिश्ते नहीं रहते। क्रोध पर नियंत्रण रखेंगे तो सफलता प्राप्त करेंगे। बाजुओं की समस्या परेशानी दे सकती है। पड़ोसियों द्वारा कम सहयोग मिलता है, जिससे विवाद की आशंका है। आपके पिता का स्वभाव काफी गुस्सैल व रूखा होता है।

चतुर्थ भाव में मंगल हो तो

कुंडली में मंगल अगर चतुर्थ भाव में है तो ऐसा व्यक्ति वाहन और संतान सुख भोगता है लेकिन मातृ सुख में कमी करता है। वह अपने घर से दूर रहता है और विभिन्न माध्यमों से लाभ कमाता है। साथ ही कार्यक्षेत्र में बड़ी तरक्की मिलती है। घर की साज-सज्जा पर हमेशा ध्यान देते हैं लेकिन आग का भय बना रहता है। यह जमीनी विवाद में फंस सकते हैं और दिमाग में काफी उथल-पुथल हो सकती है। वैवाहिक जीवन को लेकर चिंता बनी रहती है।

पंचम भाव में मंगल हो तो

कुंडली में मंगल अगर पंचम भाव में है तो ऐसा व्यक्ति काफी बुद्धिमान बनाता है लेकिन स्वभाव में हमेशा उग्रता रहती है। पेट संबंधित परेशानी हो सकती है। छल कपट से दूर रहना हितकर होता है। सट्टे बाजी के कारण घाटा उठना पड़ सकता है। पहली संतान गुस्सैल स्वभाव की होती है और चोट लगने का भय बना रहेगा। विपरित लिंग से जल्दी आकर्षित हो जाते हैं, यह आपकी बदनामी का कारण बन सकता है।

छठें भाव में मंगल हो तो

कुंडली में मंगल अगर छठें भाव में है तो मेहनत से काफी धन कमाते हैं और सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। कुछ हद तक क्रोधी स्वभाव के होते हैं और नौकरी से परेशान हो सकते हैं। पिताजी का स्वभाव काफी गुस्सैल वाला होता है। लोकप्रियता के चक्कर में जानवरों को परेशान करते हैं, जिससे बदनामी हो सकती है। मंगल की ऐसी स्थिति आपको व्यवसाय की जगह नौकरी करना ज्यादा पसंद रहेगा।

सप्तम भाव में मंगल हो तो

कुंडली में मंगल अगर सप्तम भाव में है तो वह ज्यादा अच्छे परिणाम नहीं देता। विवाह में विलंब रहता है और परिवार से अलगाव की स्थिति बनी रहती है। जीवनसाथी का व्यवहार ज्यादा अच्छा नहीं रहता। सफलता के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है और स्वभाव काफी चिड़चिड़ापन रहता है। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं रहती और व्यर्थ के कामों में धन खर्च हो सकता है। कोर्ट-कचहरी के मामले से परेशानी हो सकती है।

अष्टम भाव में मंगल हो तो

कुंडली में मंगल अगर अष्टम भाव में है तो वह ज्यादा अनुकूल परिणाम नहीं देता। कई मामलों में परेशानी रहती है। संवैधानिक पक्ष मजबूत नहीं होता और कि़डनी की समस्या परेशान कर सकती है। चोरी की वजह से धन की हानि हो सकती है और धन संचय करने में परेशानी आती है। आमदनी अच्छी नहीं रहती और दाम्पत्य जीवन में भी कुछ समस्याएं रहती हैं।

नवम भाव में मंगल हो तो

कुंडली में मंगल अगर नवम भाव में है तो ऐसा व्यक्ति काफी अभिमानी होता है। क्रोध ज्यादा रहता है और वह व्यक्ति नेता या अधिकारी बनता है। विषम परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है और यात्रा करने में मन लगता है। ज्यादा अच्छे मित्र नहीं बन पाते लेकिन 27 साल के बाद जीवन में सफलता प्राप्त कर लेते हैं। घर के सोने के बेचने से बचना चाहिए अन्यथा हानि हो सकती है।

दशम भाव में मंगल हो तो

कुंडली में मंगल अगर दशम भाव में है तो यह स्थिति काफी धनवान बनाती है और गुणवान भी होते हैं। घर की हर समसया का दूर करते हैं और काफी प्रसिद्धि पाते हैं। वाहन सुख प्राप्त करते हैं लेकिन संतान के मामले में यह स्थिति सही नहीं है। 28 व 29 वर्ष के बाद आपको बड़ा पद व प्रतिष्ठा मिलती है। मंगल की ऐसी स्थिति छोटे भाई-बहनों के लिए सही नहीं रहती और माता के स्वास्थ्य में भी परेशान करता है।

एकादश भाव में मंगल हो तो

कुंडली में मंगल अगर एकादश भाव में है तो ऐसा व्यक्ति काफी धैर्यवान होता है और घूमने-फिरने का अच्छा मौका देता है। साहसी व्यक्ति होकर जीवन में काफी लाभ कमाते हैं लेकिन क्रोध की अधिकता मुश्किल में डाल सकती है। मित्रों के सहयोग से अपनी अपनी महत्त्वाकांक्षाओं को पूरा कर लेते हैं लेकिन उनसे मतभेद बने रहते हैं। गुरुजनों का सम्मान करते हैं और स्वभाव से अपने आपको राजा समझते हैं। संतान संबंधित समस्या का सामना करते हैं।

द्वादश भाव में मंगल हो तो

कुंडली में मंगल अगर द्वादश भाव में है तो शस्त्रों में काफी निपुण होते हैं लेकिन दाम्पत्य जीवन के लिए यह स्थिति सही नहीं रहती। ज्यादा खर्चे होने के कारण कर्ज की समस्या बनी रहती है और आंखों की समस्या परेशान कर सकती है। धर्म-कर्म से जुड़े मामलों में इच्छा कम रहती है। छोटे भाई-बहनों को पद व प्रतिष्ठा बनी रहती है और आर्थिक स्थिति में उतार-चढ़ाव बना रहता है।

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