धर्म-अध्यात्म

रक्षाबंधन 2026 में बनेगा इतिहास जगन्नाथ मंदिर में तैयार हो रही विशाल राखी

nidhi
25 Aug 2026 3:23 PM IST
रक्षाबंधन 2026 में बनेगा इतिहास जगन्नाथ मंदिर में तैयार हो रही विशाल राखी
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DIY राखी

पुरी: रक्षाबंधन के पावन पर्व पर ओडिशा के पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में इस बार भी अनोखी धार्मिक परंपरा देखने को मिलेगी। गम्हा पूर्णिमा (राखी पूर्णिमा) के अवसर पर भगवान जगन्नाथ और उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र को विशेष रूप से तैयार की गई विशाल राखी अर्पित की जाएगी। इस राखी को दुनिया की सबसे बड़ी राखियों में शामिल माना जाता है।

ओडिशा में गम्हा पूर्णिमा को रक्षाबंधन के साथ-साथ भगवान बलभद्र के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन देवी सुभद्रा अपने दोनों भाइयों भगवान जगन्नाथ और भगवान बलभद्र की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं।
खास तरीके से तैयार की जाती है राखी
भगवान जगन्नाथ के लिए तैयार की जाने वाली राखी सामान्य राखियों से बिल्कुल अलग होती है। इसे मंदिर से जुड़े पटारा बिसोई सेवकों द्वारा पारंपरिक तरीके से तैयार किया जाता है। राखी बनाने में विशेष कपड़े, रंग-बिरंगे धागों और सजावटी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है।
परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ के लिए लाल और पीले रंग की राखी, जबकि भगवान बलभद्र के लिए अलग रंगों की विशेष राखी तैयार की जाती है। इन राखियों को बनाने में कई दिनों की मेहनत लगती है।
देवी सुभद्रा बांधती हैं भाइयों को राखी
रक्षाबंधन के दिन पुरी श्रीमंदिर में विशेष पूजा और अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, बहन सुभद्रा अपने भाइयों भगवान जगन्नाथ और भगवान बलभद्र की कलाई पर राखी बांधकर उनकी मंगल कामना करती हैं।
इस अवसर पर मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और श्रद्धालु इस दिव्य परंपरा के दर्शन कर खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं।
गम्हा पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
ओडिशा में गम्हा पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान बलभद्र का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है। किसान समुदाय के लिए भी यह पर्व खास माना जाता है, क्योंकि भगवान बलभद्र को कृषि और किसानों से जुड़ा देवता माना जाता है।
इस दिन घरों में भी भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन मनाया जाता है। बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं।
दुनिया भर में आकर्षण का केंद्र
पुरी जगन्नाथ मंदिर की यह अनोखी राखी हर साल श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनती है। भगवान को अर्पित की जाने वाली यह विशाल राखी भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के रिश्ते और धार्मिक आस्था की अनूठी मिसाल पेश करती है।
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