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धर्म-अध्यात्म
गणेश भक्तों के लिए खास दिन हेरंब संकष्टी पर ऐसे करें पूजा अर्चना
Ratna Netam
30 Aug 2026 5:12 PM IST

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धर्म : हिंदू धर्म में भगवान गणेश को समर्पित संकष्टी चतुर्थी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। साल 2026 में भाद्रपद मास की संकष्टी चतुर्थी 31 अगस्त, सोमवार को मनाई जाएगी। इसे **हेरंब संकष्टी चतुर्थी** कहा जाता है। इस दिन भक्त भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर जीवन में आने वाले संकटों से मुक्ति, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।
संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्रमा के दर्शन के बाद पूरा माना जाता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु दिनभर उपवास रखते हैं और शाम को भगवान गणेश की पूजा करने के बाद रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलते हैं। दिल्ली में 31 अगस्त को चंद्रोदय का समय रात करीब **8 बजकर 25 मिनट** बताया गया है। हालांकि अलग-अलग शहरों में चंद्रमा निकलने का समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।
हेरंब संकष्टी चतुर्थी की तिथि और समय
पंचांग के अनुसार 31 अगस्त 2026 को चतुर्थी तिथि सुबह करीब **8 बजकर 50 मिनट** से शुरू होगी और अगले दिन 1 सितंबर की सुबह तक रहेगी। इसी वजह से चंद्रोदय के आधार पर संकष्टी चतुर्थी का व्रत 31 अगस्त को रखा जाएगा।
हेरंब गणपति भगवान गणेश के विशेष स्वरूपों में से एक माने जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार हेरंब स्वरूप की पूजा करने से भय, परेशानियों और बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
भगवान गणेश की पूजा का महत्व
संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश को विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि गणपति की आराधना करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता मिलती है।
भक्त इस दिन गणेश जी को दूर्वा, सिंदूर, लाल फूल और मोदक अर्पित करते हैं। भगवान गणेश की पूजा के साथ गणेश मंत्रों का जाप और गणेश चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है।
हेरंब संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान गणेश के सामने व्रत का संकल्प लें।
पूजा के लिए भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। दीपक जलाकर गणेश जी को जल, अक्षत, दूर्वा, फूल और सिंदूर अर्पित करें। इसके बाद भगवान गणेश को मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।
पूजा के दौरान:
* भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करें
* गणेश चालीसा का पाठ करें
* परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें
* शाम को विधि-विधान से आरती करें
इसके बाद चंद्रमा निकलने पर उन्हें जल, अक्षत और फूल मिलाकर अर्घ्य दें। चंद्र पूजा के बाद व्रत का पारण किया जाता है।
चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा
संकष्टी चतुर्थी व्रत में चंद्रमा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि भगवान गणेश की पूजा के साथ चंद्र देव की आराधना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
व्रती रात में चंद्रमा के दर्शन करके उन्हें अर्घ्य देते हैं। इसके बाद भगवान गणेश को प्रसाद अर्पित कर स्वयं प्रसाद ग्रहण करते हैं।
व्रत में रखें इन बातों का ध्यान
संकष्टी चतुर्थी के दिन श्रद्धालुओं को सात्विक भोजन का पालन करना चाहिए। जो लोग निर्जला व्रत रखने में सक्षम नहीं हैं, वे फलाहार भी कर सकते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा के दौरान मन को शांत रखना चाहिए और भगवान गणेश का ध्यान करना चाहिए। किसी भी प्रकार के विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।
क्यों खास है हेरंब संकष्टी चतुर्थी?
हेरंब संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश के हेरंब स्वरूप को समर्पित होती है। हेरंब गणपति को सुरक्षा और संकटों से रक्षा करने वाला स्वरूप माना जाता है।
भक्त इस दिन गणेश जी से जीवन की परेशानियों को दूर करने और परिवार में सुख-शांति बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।
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