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धर्म-अध्यात्म
नवरात्र के पहले दिन ऐसे करें कलश स्थापना, जानें पूजा विधि
nidhi
11 Oct 2026 8:22 AM IST

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आज से शारदीय नवरात्र शुरू
11 अक्टूबर 2026 से शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो गई है। इस नौ दिवसीय पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना और घटस्थापना का विशेष महत्व है। घटस्थापना के साथ ही घरों और मंदिरों में नवरात्र पूजा का संकल्प लिया जाता है।
ध्यान दें कि घटस्थापना का शुभ मुहूर्त शहर और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए पूजा का समय तय करते समय अपने क्षेत्र के पंचांग को प्राथमिकता देना उचित है।
शारदीय नवरात्र 2026: घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
11 अक्टूबर के लिए दिल्ली के पंचांग के अनुसार घटस्थापना का सामान्य शुभ मुहूर्त सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक बताया गया है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक है। दूसरे शहरों में समय अलग हो सकता है।
घटस्थापना के लिए पूजा सामग्री
कलश स्थापना और मां दुर्गा की पूजा के लिए ये सामग्री रख सकते हैं:
- मिट्टी का कलश और शुद्ध जल
- गंगाजल, आम या अशोक के पत्ते
- नारियल, लाल कपड़ा और कलावा
- जौ बोने के लिए मिट्टी और पात्र
- रोली, कुमकुम, अक्षत और हल्दी
- फूल, माला, फल और मिठाई
- धूप, दीपक, घी और रूई की बत्ती
- पान, सुपारी और पूजा के लिए सिक्का
पूजा की परंपरा परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है।
घटस्थापना की पूजा विधि
पहला चरण: सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल की सफाई करें। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
दूसरा चरण: पूजा स्थल के पास मिट्टी के पात्र में साफ मिट्टी भरकर जौ बोएं। इसके बाद कलश में शुद्ध जल भरें और परंपरा के अनुसार उसमें सुपारी, सिक्का तथा अन्य पूजन सामग्री डालें।
तीसरा चरण: कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते रखें। उसके ऊपर नारियल स्थापित करें। नारियल पर लाल कपड़ा और कलावा बांध सकते हैं। कलश को स्थापित करते समय ध्यान रखें कि वह स्थिर स्थान पर रखा हो।
चौथा चरण: भगवान गणेश और मां दुर्गा का ध्यान करते हुए पूजा का संकल्प लें। पहले दिन मां शैलपुत्री को फूल, अक्षत, कुमकुम और भोग अर्पित करें।
पांचवां चरण: घी का दीपक और धूप जलाकर मां की आरती करें। श्रद्धा के अनुसार दुर्गा चालीसा, देवी मंत्र या अन्य स्तुति का पाठ करें। पूजा के अंत में माता से परिवार की सुख-शांति और कल्याण की प्रार्थना करें।
नवरात्र के नौ दिनों में किस देवी की पूजा होगी?
तारीख मां दुर्गा का स्वरूप
11 अक्टूबर मां शैलपुत्री
12 अक्टूबर मां ब्रह्मचारिणी
13 अक्टूबर मां चंद्रघंटा
14 अक्टूबर मां कूष्मांडा
15 अक्टूबर मां स्कंदमाता
16 अक्टूबर मां कात्यायनी
17 अक्टूबर मां कालरात्रि
18 अक्टूबर मां महागौरी की पूजा परंपरा के अनुसार
19 अक्टूबर मां सिद्धिदात्री की पूजा परंपरा के अनुसार
20 अक्टूबर विजयादशमी
तिथियों और देवी-पूजन के क्रम में स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है।
नवरात्र में पूजा करते समय इन बातों का रखें ध्यान
नवरात्र के दौरान श्रद्धालु अपनी आस्था और पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत रखते हैं। व्रत रखने वालों को अपनी सेहत और खानपान का ध्यान रखना चाहिए। पूजा स्थल को साफ रखें और दीपक जलाते समय अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखें। अखंड ज्योति जलाने की परंपरा हो तो उसकी सुरक्षित व्यवस्था करें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र मां दुर्गा की आराधना, आत्मसंयम और साधना का पर्व है। इन नौ दिनों में भक्त मां के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा कर सुख-समृद्धि और शक्ति की कामना करते हैं।
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