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धर्म-अध्यात्म
लेह में सजा हेमिस महोत्सव, रंग-बिरंगी परंपराओं और आध्यात्मिक उत्सव का संगम
nidhi
25 Jun 2026 3:35 PM IST

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लद्दाख में गूंजे धार्मिक संगीत और मुखौटा नृत्य
लद्दाख के हेमिस मठ में हेमिस फेस्टिवल, जिसे हेमिस त्सेचु भी कहा जाता है, बहुत उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। तिब्बती चंद्र कैलेंडर के अनुसार, हेमिस फेस्टिवल जून या जुलाई में मनाया जाता है। यह फेस्टिवल बौद्ध धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और जीवंत उत्सवों में से एक है, जो गुरु पद्मसंभव की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। यह दो दिन का उत्सव हर साल आयोजित किया जाता है और इस साल यह 24 जून को शुरू हुआ और 25 जून को समाप्त होगा। गुरु पद्मसंभव, जिन्हें गुरु रिनपोछे के नाम से भी जाना जाता है, तिब्बती बौद्ध धर्म के संस्थापक माने जाते हैं।
Today is the first day of the 2-day Hemis Festival. I was there in 2023, packed into the stone courtyard of Hemis Monastery as masked monks emerged in vivid robes, drums rolled across the valley, and long horns echoed off the mountains. A sight I'll never forget! https://t.co/eJQdAl9FtM pic.twitter.com/949Pj7pjqs
— Panthera uncia (@anya_wanders) June 24, 2026
लद्दाख में हेमिस फेस्टिवल का आयोजन
केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख आध्यात्मिक फेस्टिवल 'हेमिस' मना रहा है, जो बुधवार, 24 जून 2026 को शुरू हुआ और गुरुवार, 25 जून 2026 तक चलेगा। फेस्टिवल का उद्घाटन लद्दाख के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना की उपस्थिति में हुआ। यह फेस्टिवल लद्दाख के हेमिस गांव में स्थित ऐतिहासिक हेमिस मठ में आयोजित किया जाता है। इसे लद्दाख का सबसे बड़ा और सबसे समृद्ध बौद्ध मठ भी माना जाता है। खूबसूरत पहाड़ों के बीच बसा यह मठ उत्सव के दौरान आध्यात्मिक भक्ति, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पारंपरिक रीति-रिवाजों का केंद्र बन जाता है।
रीति-रिवाज और उत्सव
उत्सव की शुरुआत पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों, प्रार्थनाओं और प्रसिद्ध 'चम नृत्य' से होती है। यह एक पवित्र मुखौटा नृत्य है जिसे बौद्ध भिक्षु रंग-बिरंगे रेशमी वस्त्र और विशेष मुखौटे पहनकर करते हैं। ये पारंपरिक नृत्य बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक हैं और माना जाता है कि इन्हें देखने वालों को आशीर्वाद, समृद्धि और सुरक्षा मिलती है।
Hon’ble @lg_ladakh Shri Vinai Kumar Saxena, graced the Annual Hemis Festival at the revered Hemis Monastery, a sacred celebration dedicated to Guru Padmasambhava. The festival stands as one of Ladakh’s most significant spiritual and cultural occasions, reflecting the region’s… pic.twitter.com/QxZEgVMsJ7
— Lok Niwas Ladakh (@LokNiwasLadakh) June 25, 2026
मठ का आंगन पारंपरिक संगीत - जैसे ड्रम, झांझ और लंबे हॉर्न - की आवाज़ से जीवंत हो उठता है, जिससे एक गहरा आध्यात्मिक माहौल बनता है। भिक्षु प्रार्थना और अनुष्ठान करते हैं, जबकि भक्त शांति, खुशी और कल्याण के लिए आशीर्वाद मांगते हैं। इस फेस्टिवल में 'थंगका' पेंटिंग भी प्रदर्शित की जाती हैं।
सांस्कृतिक महत्व
धार्मिक महत्व के अलावा, यह फेस्टिवल पर्यटकों को लद्दाख की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक भी दिखाता है। स्थानीय कारीगर और व्यापारी पारंपरिक हस्तशिल्प, आभूषण, कपड़े और क्षेत्रीय व्यंजन प्रदर्शित करते हैं, जिससे यह एक प्रमुख सांस्कृतिक आकर्षण बन जाता है।
गुरु पद्मसंभव
गुरु पद्मसंभव, जिन्हें 'लोटस गुरु' के नाम से भी जाना जाता है, 'न्यिंगमा' परंपरा के संस्थापक माने जाते हैं। यह तिब्बती बौद्ध धर्म के चार प्रमुख संप्रदायों में सबसे पुराना है। गुरु पद्मसंभव को तिब्बती बौद्ध धर्म के संस्थापकों में से एक माना जाता है।
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