धर्म-अध्यात्म

अखंड सौभाग्य की कामना का पर्व हरियाली तीज आज जानें पूजा और शुभ योग का महत्व

nidhi
15 Aug 2026 8:21 AM IST
अखंड सौभाग्य की कामना का पर्व हरियाली तीज आज जानें पूजा और शुभ योग का महत्व
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चार शुभ योगों में होगी शिव-गौरी पूजा, सुहागिनों के लिए खास दिन
नई दिल्ली : हिंदू धर्म में हरियाली तीज का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह त्योहार भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट प्रेम, समर्पण और वैवाहिक सुख का प्रतीक है। वर्ष 2026 में हरियाली तीज का पर्व विशेष संयोगों के साथ मनाया जा रहा है। इस बार चार शुभ योगों के दुर्लभ संयोग में महिलाएं भगवान शिव और माता गौरी की पूजा कर अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करेंगी।
सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाने वाली हरियाली तीज को श्रावणी तीज भी कहा जाता है। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करती हैं और भगवान शिव से अपने वैवाहिक जीवन में प्रेम, विश्वास और सुख की प्रार्थना करती हैं।
चार शुभ योगों के कारण बढ़ा महत्व
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस वर्ष हरियाली तीज पर चार शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। शुभ योगों में पूजा-पाठ, दान और धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है।
महिलाएं इस दिन सुबह स्नान के बाद नए वस्त्र धारण करती हैं और सोलह श्रृंगार कर पूजा की तैयारी करती हैं। घरों और मंदिरों में विशेष सजावट की जाती है।
शिव-पार्वती के मिलन की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।
कहा जाता है कि हरियाली तीज के दिन ही शिव और पार्वती का पुनर्मिलन हुआ था। इसी कारण इस दिन शिव-पार्वती की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख, प्रेम और स्थिरता आने की मान्यता है।
सुहागिन महिलाएं रखती हैं व्रत
हरियाली तीज पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत रखती हैं। कई महिलाएं निर्जला व्रत भी रखती हैं और शाम के समय पूजा के बाद व्रत खोलती हैं।
अविवाहित कन्याएं भी अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति और मनोकामना पूरी होने की इच्छा से यह व्रत करती हैं। पूजा के दौरान भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की आराधना की जाती है।
महिलाएं माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री, फल, मिठाई, वस्त्र और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करती हैं। इसके बाद परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं।
देशभर में दिखता है उत्साह
हरियाली तीज का पर्व उत्तर भारत के कई राज्यों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली समेत कई क्षेत्रों में महिलाएं पारंपरिक परिधान पहनकर इस त्योहार को मनाती हैं।
इस मौके पर महिलाएं झूला झूलती हैं, लोकगीत गाती हैं और एक-दूसरे को तीज की शुभकामनाएं देती हैं। बाजारों में भी मेहंदी, चूड़ी, कपड़े और पूजा सामग्री की खरीदारी को लेकर रौनक दिखाई देती है।
प्रकृति और संस्कृति का अनोखा संगम
हरियाली तीज केवल धार्मिक पर्व नहीं बल्कि प्रकृति और संस्कृति के जुड़ाव का भी प्रतीक है। सावन महीने में चारों ओर हरियाली छा जाती है, इसलिए इस पर्व को प्रकृति के सौंदर्य और नई ऊर्जा से भी जोड़ा जाता है।
शिव और शक्ति की आराधना से जुड़े इस त्योहार पर लोग सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। चार शुभ योगों के दुर्लभ संयोग में मनाई जा रही इस बार की हरियाली तीज को श्रद्धालु बेहद शुभ और फलदायी मान रहे हैं।
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