धर्म-अध्यात्म

Hanuman ji निभाएंगे कल्कि अवतार में अहम भूमिका, शास्त्रों में है उल्लेख

Tara Tandi
11 Jun 2025 11:42 AM IST
Hanuman ji निभाएंगे कल्कि अवतार में अहम भूमिका, शास्त्रों में है उल्लेख
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Hanuman ji ज्योतिष न्यूज़: राम भक्त हनुमान जी की कहानियां हम सभी बचपन से सुनते आ रहे हैं, जिन्हें अमर होने का वरदान प्राप्त है। मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी कलियुग में भी मौजूद हैं। जब भी किसी व्यक्ति को डर लगता है तो वह हनुमान मंत्र या हनुमान जी का नाम लेता है, जिससे सारा डर दूर हो जाता है। उनकी कहानियां किसी से छिपी नहीं हैं। रामायण कथा के अनुसार भगवान श्री राम ने कलियुग में अपने भक्तों की सहायता करने की जिम्मेदारी बजरंगबली को सौंपी थी। इसका उल्लेख कल्कि पुराण और विष्णु पुराण में भी मिलता है। कल्कि पुराण के अनुसार जब भगवान विष्णु कल्कि अवतार के रूप में जन्म लेंगे, तब धर्म की रक्षा के लिए हनुमान जी एक बार फिर उनकी सहायता के लिए मौजूद रहेंगे। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि कलियुग में हनुमान जी कहां रहते हैं।
गंधमादन पर्वत
श्रीमद्भगवद गीता के अनुसार हनुमान जी त्रेता युग और द्वापर युग दोनों में मौजूद थे। वहीं अगर कलयुग की बात करें तो हनुमान जी गंधमादन पर्वत पर रहते हैं, जो कैलाश पर्वत के उत्तर में स्थित एक हिमालय है। प्राचीन काल में गंधमादन पर्वत सुमेरु पर्वत की चारों दिशाओं में स्थित गजदंत पर्वतों में से एक था, जहां महर्षि कश्यप ने तपस्या की थी। आपको बता दें कि यह कुबेर के क्षेत्र का भी हिस्सा था।
वनस्पतियों से भरपूर है
वर्तमान की बात करें तो यह पर्वत तिब्बत क्षेत्र में आता है। यह स्थान आज भी फूलों और वनस्पतियों से भरा हुआ है। रामायण काल ​​से ही इस पर्वत का विशेष महत्व रहा है। आज भी इस पर्वत पर हनुमान जी का मंदिर स्थित है। स्थानीय लोगों का मानना ​​है कि हनुमान जी यहां रूप बदलकर अपने भक्तों को दर्शन देने आते हैं, जहां भगवान राम के पैरों के निशान भी हैं।
हनुमान जी ने ली थी भीम की परीक्षा
इसके अलावा महाभारत की कथा में भी इस पर्वत का जिक्र है। जब पांडव अपने वनवास के दौरान हिमालय पार कर गंधमादन पर्वत पर पहुंचे, जहां उन्होंने हनुमान जी को विश्राम करते देखा तो उन्होंने एक बूढ़े बंदर का वेश धारण कर गदाधारी भीम की परीक्षा ली। पुरानी कथाओं के अनुसार इस पर्वत पर गंधर्व, किन्नर, अप्सराएं और सिद्ध ऋषि निवास करते हैं। यहां किसी भी इंसान का पहुंचना बहुत मुश्किल है। मान्यता है कि यह पर्वत दिव्य है। बदलते वक्त के साथ इस पर्वत का स्वरूप काफी बदल गया है, लेकिन राम भक्त हनुमान की पूजा आज भी उसी तरह की जाती है।
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